लखीमपुर-खीरी: बैक यार्ड पोल्ट्री प्रोजेक्ट गरीबों के लिए बनेगा सहारा

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लखीमपुर-खीरी, अमृतविचार। जिले में अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए पशुपालन विभाग ने बैक यार्ड पोल्ट्री प्रोजेक्ट शुरू कराएगा। जिसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं छोटे स्तर पर मुर्गी पालन का रोजगार शुरू कर सकेंगी। यदि ठीक से संचालन करेंगी तो यह उनकी जीविका में बड़ा सुधार ला सकता है। प्रथम चरण में यह योजना …

लखीमपुर-खीरी, अमृतविचार। जिले में अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए पशुपालन विभाग ने बैक यार्ड पोल्ट्री प्रोजेक्ट शुरू कराएगा। जिसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं छोटे स्तर पर मुर्गी पालन का रोजगार शुरू कर सकेंगी। यदि ठीक से संचालन करेंगी तो यह उनकी जीविका में बड़ा सुधार ला सकता है। प्रथम चरण में यह योजना जिले के चार विकास खंडों में संचालित की जाएगी। इसके लिए विभाग ने आवेदन प्रकिया शुरू कर दी है। यदि योजना ठीक से संचालित हुई तो इसमें आगे और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना होगी।

बेरोजगारी के इस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ न कुछ व्यवसाय करने की आवश्यकता है। हालांकि संसाधनों के अभाव के कारण लोग अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पाते है। बैंकों से ऋण मिलने में भी लोगों को दिक्कतें होती है। इसके लिए पशुपालन विभाग ने बहुत छोटे स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों की अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए यह योजना शुरू की है। इसमें उन्हें रोजगार के लिए ऋण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि विभाग उन्हें सारी सुविधाएं स्वयं उपलब्ध कराएगा।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अर्जुन सिंह ने बताया कि इस योजना में ग्रामीण क्षेत्र के अनुसूचित जाति की ऐसी महिलाओं को चुना जाएगा जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही हो। योजना शुरूआत में चार विकास खंडों में संचालित की जाएगी। इसमें बांकेगंज, धौरहरा, ईसानगर और रमियाबेहड़ विकास खंडों को शामिल किया गया है। इन विकास खंडों के 200 लोगों को लाभान्वित किया जाएगा। बाद में जैसे परिणाम आएंगे उसी हिसाब से आगे बढ़ाया जाएगा।

योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को 50 चूजों के साथ छोटे स्तर पर मुर्गी पालन कराया जाएगा। इसमें लाभार्थी को 50 चूजों के अलावा उन्होंने खिलाने के लिए लगभग 27 किलोग्राम राशन प्रति लाभार्थी दिया जाएगा। उन्हें पालने के लिए छप्पर आदि की व्यवस्था भी विभाग कराएगा।

तीन दिन का दिया जाएगा प्रशिक्षण
योजना में चयनित लाभार्थियों कों मुर्गी पालन और बिक्री करने आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्हें बीमारियों से बचाने आहार देने आदि के बारे में बताया जाएगा। प्रशिक्षण में आवश्यक सावधानियों के बारे में तथा रोजगार को आगे बड़ा रूप कैसे दें इस बारे में विशेषज्ञों की सलाह दिलाई जाएगी।

सभी लाभार्थियों को दी जाएगी दवा की किट
मुर्गी पालन के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती चूजों को बीमारियों से बचाने की होती है। बीमारी होने पर एक साथ बड़ी संख्या में चूजे खत्म हो जाते है। यह व्यापार को प्रभावित करने वाला होता है। इसके लिए विभाग इन सभी लाभार्थियों को प्रशिक्षण में बीमारियों के बारे में बताएगा साथ ही उन्हें कुछ दवाएं, विटमिन, एंटीबायोटिक आदि देगा जिससे बीमारी होने पर वे उनका उपचार कर सकें।

छोटी लेकिन अच्छी शुरूआत है
गरीबी रेखा से नीचे लोगों के लिए छोटे स्तर पर सरकार का प्रयास है। सरकार शुरूआत करा देगी। इस सहायता के बदले कुछ नहीं लिया जाएगा। बाद में जो लोग चाहें वे छोटे स्तर पर ही धीरे-धीरे आगे अपने व्यवसाय को बड़ा रूप दे सकते हैं। लाभार्थियों की आवश्यक जानकारी विभाग से मिलती रहेगी। -अर्जुन सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी

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