नया हथियार

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Edited By Amrit Vichar
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एक बार फिर सीमा पार से देश में खतरनाक हथियार भेजने के लिए ड्रोन का प्रयोग किया गया है। शनिवार की रात ये हथियार जम्मू-कश्मीर के फलियन मंडल इलाके में गिराए गए। नियंत्रण रेखा के पार से भारत में हथियारों की खेप पहुंचाने और ड्रग्स भेजने के लिए पाकिस्तान 2020 के उत्तरार्ध से ही ड्रोन …

एक बार फिर सीमा पार से देश में खतरनाक हथियार भेजने के लिए ड्रोन का प्रयोग किया गया है। शनिवार की रात ये हथियार जम्मू-कश्मीर के फलियन मंडल इलाके में गिराए गए। नियंत्रण रेखा के पार से भारत में हथियारों की खेप पहुंचाने और ड्रग्स भेजने के लिए पाकिस्तान 2020 के उत्तरार्ध से ही ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। इसी वर्ष जून में वायुसेना स्टेशन जम्मू पर हुए ड्रोन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन देखे जाने के मामले निरंतर बढ़ गए हैं।

ड्रोन से हुआ यह हमला आतंकी हमलों के तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत माना गया। 26-27 जून की मध्य रात्रि को जम्मू स्टेशन के उच्च सुरक्षा तकनीकी क्षेत्र में दो विस्फोट हुए थे। 23 जुलाई को अखनूर सेक्टर के गुराह पट्टन इलाके में पांच किलो आईईडी ले जा रहे एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया था। इन घटनाओं के जरिये आतंकियों ने खासकर जम्मू-कश्मीर में खतरे की आशंका को और बढ़ा दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञ सीमा पार से आंतकी संगठनों द्वारा ड्रोन के इस्तेमाल की आशंका पहले से जताते रहे हैं।

विशेषज्ञों का यह आकलन निराधार नहीं है कि भविष्य के संघर्षों में आतंकवादी एवं उनके आका अपने नापाक इरादों की पूर्ति के लिए ड्रोन का अधिक इस्तेमाल कर सकते हैं। अर्न्स्ट ऐंड यंग तथा फिक्की द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि ड्रोन सुरक्षा के लिए खतरा हैं, लिहाजा इनकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। रिपोर्ट बताती हैं कि पाकिस्तान ड्रोन खरीदने के लिए तुर्की और इस्राइल की मदद ले रहा है, जैसे उसने कुछ वर्षों तक चीन की मदद ली, जो छोटे आकार के ड्रोन का सबसे बड़ा निर्माता है। भारतीय सैनिकों ने कई बार सीमा पार से ड्रोनों को देखने पर निष्प्रभावी किया है।

परंतु भारतीय सुरक्षा बलों के लिए चुनौती है कि ड्रोन इतने छोटे हैं कि वे रडार की पकड़ में नहीं आते। हालांकि भारत सरकार अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए तीन अरब डॉलर खर्च कर 30 सशस्त्र (आर्म्ड) ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है। जानकारों के अनुसार भारत की तीनों सेनाओं के लिए 10-10 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन खरीदे जाएंगे। ड्रोन्स के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद भारतीय सेना की क्षमता और शक्ति में इजाफा होगा और अपने पड़ोसियों पर नजर रख पाने में भारतीय सेना को आसानी होगी। फिर भी देश में आतंकियों की हरकतों को नाकाम करने के तरीके और ड्रोन विरोधी तकनीक को तेजी से विकसित किए जाने की जरूरत है।