चिंता की बात
वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चीन बड़ी संख्या में सैन्य तैनाती और ढांचागत सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। चिंता की बात है कि कहीं चीन-पाकिस्तान गठजोड़ के चलते पाकिस्तान पश्चिमी सैन्य प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण चीन को ना कर दे। मंगलवार को वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने कहा कि चीनी वायु …
वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चीन बड़ी संख्या में सैन्य तैनाती और ढांचागत सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। चिंता की बात है कि कहीं चीन-पाकिस्तान गठजोड़ के चलते पाकिस्तान पश्चिमी सैन्य प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण चीन को ना कर दे। मंगलवार को वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने कहा कि चीनी वायु सेना की सैनिक ठिकानों पर तैनाती और अन्य ढांचागत तैयारियों से भारतीय वायु सेना पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। वायुसेना किसी भी आकस्मिक स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।
चीन की बढ़ती सैन्य ताकत भारत के लिए चिंता का विषय है। ध्यान देना होगा कि चीन के सैन्य आधुनिकीकरण का वर्तमान दौर 1990 के दशक में आरंभ हुआ। अब तक उसका सारा ध्यान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के हथियारों एवं प्रणालियों की गुणवत्ता को बढ़ाने पर केंद्रित रहा। उसका मानना है कि ‘एक मजबूत सेना’ चीन के स्वप्न को साकार बना सकती है, जिससे 2049 तक चीन एक महाशक्ति का दर्जा प्राप्त कर लेगा। जैसे-जैसे चीन की वैश्विक उपस्थिति उसके बढ़ते आर्थिक हितों के साथ बढ़ रही है, चीन अपने हितों का समर्थन करने के लिए एक वैश्विक बुनियादी ढांचे का भी निर्माण कर रहा है।
चीन की सेना का मुख्य फोकस ताईवान जलडमरूमध्य एवं दक्षिण चीनी सागर में नई आकस्मिक स्थितियों तथा जापान एवं कोरिया के समुद्रों को लेकर एक संभावित संघर्ष पर है। चीन ने जनवरी 2014 से हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक वाहन के कुल चार परीक्षण किए हैं। इसका लक्ष्य चीन को अमेरिकी मिसाइल प्रतिरक्षाओं से बचाव उपलब्ध कराना है। भारत के संदर्भ में चीन ने लद्दाख क्षेत्र में संघर्षपूर्ण हालात पैदा किए हैं। चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत हिंद महासागर में उसकी सैन्य मौजूदगी भारत की मुख्य चिंता है। वह दक्षिण चीन समुद्र में अपनी ताकत बढ़ा रहा है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बंदरगाह और सैन्य ठिकाने बढ़ाने के मद्देनजर बड़ी वैश्विक शक्तियों की निगाह में है। चीन ने फाइटर, जैट मिसाइल, क्रूजर और परमाणु पनडुब्बी की संख्या में काफी इजाफा किया है। हालांकि भारत ने पानी के भीतर युद्धक क्षमता और ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से छह अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बबियों के निर्माण का फैसला किया है। योजना पर 43 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी। बदली हुई परिस्थितियों में जरूरत इस बात की है कि हम मल्टी डोमेन क्षेत्र में युद्ध करने की क्षमता हासिल करें। साथ ही दोनों देशों को गलतफहमियों को न्यूनतम करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
