हल्द्वानी: प्राग फार्म में विस्थापन को डीएम की रिपोर्ट का इंतजार
हल्द्वानी, अमृत विचार। जमरानी बांध की निर्माण में डूब क्षेत्र के लोगों का विस्थापन का पेच फंसा है। तमाम प्रयासों के बावजूद छह गांवों के ग्रामीणों के लिए दूसरी जगह अभी तक नहीं मिल सकी। इसे अनियोजित विकास का ही नमूना कहा जाएगा कि इतनी बड़ी योजना बन गई। इसपर सालों से काम चल रहा …
हल्द्वानी, अमृत विचार। जमरानी बांध की निर्माण में डूब क्षेत्र के लोगों का विस्थापन का पेच फंसा है। तमाम प्रयासों के बावजूद छह गांवों के ग्रामीणों के लिए दूसरी जगह अभी तक नहीं मिल सकी। इसे अनियोजित विकास का ही नमूना कहा जाएगा कि इतनी बड़ी योजना बन गई। इसपर सालों से काम चल रहा है। लेकिन प्रभावितों को कहां बसाया जाएगा। इसके लिए आज भी भूमि तय नहीं हो पाई है।
जमरानी बांध परियोजना को लेकर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पिछले एक साल से हलचल कुछ तेज हुई थी। फॉरेस्ट से लेकर अन्य तकनीकी सर्वे हुए। जल निगम ने बांध से शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर पूरा प्लान तैयार करने के साथ बजट प्रस्ताव भी तैयार कर लिया। लेकिन अब सबसे बड़ी दुविधा विस्थापन का लेकर बनी हुई है।
छह गांव के विस्थापन के लिए करीब 400 एकड़ भूमि चाहिए। किच्छा, सितारगंज, बाजपुर के अलावा गौलापार में भी भूमि की तलाश हुई, लेकिन पर्याप्त जगह नहीं मिल सकी। ग्रामीणों ने किच्छा के प्राग फॉर्म में विस्थापन की मांग की है। लेकिन डीएम ऊधमसिंह नगर से फाइनल रिपोर्ट अब तक नहीं मिली।
14 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा
हल्द्वानी से 10 किमी अपस्ट्रीम में 2584 करोड़ रुपए लागत की जमरानी बांध परियोजना का कार्य उत्तराखंड परियोजना विकास एवं निर्माण निगम के अंतर्गत गठित पीआईयू के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है। इस बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण के अंतर्गत 150.60 मीटर ऊंचा रोलर कम्पेक्ड कंक्रीट ग्रेविटी बांध निर्मित होगा। इससे 14 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में 150027 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही पेयजल भी मिलेगा।
विस्थापन के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। प्राग फार्म में भी भूमि की उपलब्धता की जानकारी ली जा रही है। इसके लिए ऊधमसिंह नगर डीएम को प्रस्ताव भेजा है। रिपोर्ट का इंतजार है।- बीबी पांडे, अधिशासी अभियंता (पुनर्वास) जमरानी बांध परियोजना
