बरेली: निकिता की डायरी के पन्ने पढ़ते ही भर आती है मां-बाप की आंखें

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। निकिता यूं ही जिंदगी से नहीं हारी। उसने ससुरालियों के जुल्म हर रोज सहे लेकिन परिवार न टूटे, इसलिए वह उन्हें बर्दाश्त करती रही। उसकी आत्महत्या के बाद उसका दिया लिफाफा जब मां ने खोला तो वह उसकी डायरी के पन्ने पढ़कर कुछ समय के लिए सन्न रह गए। उनकी बेटी ने …

बरेली, अमृत विचार। निकिता यूं ही जिंदगी से नहीं हारी। उसने ससुरालियों के जुल्म हर रोज सहे लेकिन परिवार न टूटे, इसलिए वह उन्हें बर्दाश्त करती रही। उसकी आत्महत्या के बाद उसका दिया लिफाफा जब मां ने खोला तो वह उसकी डायरी के पन्ने पढ़कर कुछ समय के लिए सन्न रह गए। उनकी बेटी ने अपने ऊपर होने वाले जुल्मों के बारे में बताया था। उसको ससुराल में कैसे रखा जाता है इसका भी पत्र में जिक्र किया है। निकिता के पिता ने एसएसपी से मिलकर कुछ कागजात सौंपकर इंसाफ की मांग की है।

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जनपद के काशीपुर के मोहल्ला सिंघान निवासी व्यापारी हरिओम अग्रवाल ने बेटी निकिता की शादी 29 जनवरी 2012 में बारादरी की आंचल कॉलोनी निवासी सर्राफ नितेश अग्रवाल के साथ की थी। उनकी आलमगिरीगंज में सर्राफ की दुकान है। उनके दो में बेटा दक्ष व पांच साल की बेटी धरा है। 26 सितंबर की रात उन्होंने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। उनका शव पंखे से रुपट्टे से लटका हुआ था।

इसकी जानकारी होने पर निकिता का परिवार बरेली आया और आरोपी नितेश उसके पिता सुरेश अग्रवाल, सास संतोष देवर राहुल अग्रवाल के खिलाफ दहेज अधिनियम के आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद वह अपने घर चले गए। तीन दिन पहले हरिओम की पत्नी ने उन्हें बताया कि निकिता ने कुछ समय पहले उन्हें एक लिफाफा दिया था। लेकिन उसे न खोलने की कसम भी दी थी।

इसके बाद पिता ने लिफाफा खोला तो देखा की उसमें उसकी डायरी के कुछ पन्ने थे। जिसमें लिखा था कि उसे ससुराल में परेशान किया जाता है। उसके साथ मारपीट की जाती है। दुश्मन को भी ऐसी ससुराल न मिले। कभी कभी उसका मन करता है कि वह बच्चों को जन्म ही न दे और सुसाइड कर ले। उसके बीमार होने पर उसे ताना मारते है कि दवाई का खर्चा अपने मायके से मंगा। महिलाएं उसके साथ धक्का मुक्की करती हैं। इससे पहले वह मरने की कोशिश कर चुकी है। इसके बाद भी उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। यह सब बाते पढ़ने के बाद पिता ने इन पत्रों को एसएसपी को सौंप दिया है। जिन्हें विवेचना में शामिल किया जाएगा।

10 दिन बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी
कभी पुलिस आत्हत्या के लिए उकसाने के मामले में तुरंत गिरफ्तारी कर आरोपियों को जेल भेज देती है तो कभी 10 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस दबिश तक नहीं देती। आईओ ने मृतका के पिता को बताया कि उनके द्वारा दर्ज कराए गए मामले में गिरफ्तारी की धारा ही नहीं बन रही है। जबकि इस मामले में अधिकतम सजा 10 वर्ष है।

बनाने लगे समझौते का दबाव
हरिओम अग्रवाल ने बताया कि आरोपी उनपर और उनके रिश्तेदारों पर लगातार समझौता करने का दबाब बना रहे हैं। अगर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है वह उन्हें इसी तरह से परेशान करते रहेंगे। पुलिस भी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही है।

2012 और 2014 के हैं पन्ने
निकिता ने जिन पन्नों को फाड़कर मां को लिफाफे में दिया था। उसमें जो पन्ने मिले हैं वह वर्ष 2012 और 2014 में लिए गए है। इससे साफ जाहिर होता है कि वह शादी के बाद से ही ससुराल में परेशान रह रही थी। परिवार का कहना है कि बाकी की डायरी गायब है। यदि वह मिल जाए तो और सच भी सामने आ जाएगा।

मृतका के पिता ने कुछ कागज दिए हैं। जिसमें मरने वाली महिला ने आपबीती लिखी है। उसे विवेचना में शामिल किया जाएगा। जल्द ही इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी भी होगी। -रोहित सिंह सजवाण

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