बरेली: इजरायली तकनीक से फूलों की खेती को बनाया रोजगार का जरिया
शिवांग पांडेय, अमृत विचार, बरेली। लोगों की चाहत होती है, कि वह अपने घर के आंगन में फूलों की क्यारी सजाएं। फूलों की महक से उनका घर भी महक उठे। एक युवक ने अपनी इस चाहत को ही व्यवसाय में परिवर्तित कर लिया। फरीदपुर के मोहल्ला महादेव निवासी प्रफुल अग्रवाल ने फूलों की खेती को …
शिवांग पांडेय, अमृत विचार, बरेली। लोगों की चाहत होती है, कि वह अपने घर के आंगन में फूलों की क्यारी सजाएं। फूलों की महक से उनका घर भी महक उठे। एक युवक ने अपनी इस चाहत को ही व्यवसाय में परिवर्तित कर लिया। फरीदपुर के मोहल्ला महादेव निवासी प्रफुल अग्रवाल ने फूलों की खेती को ही अपना व्यवस्याय बना लिया। इस दौरान प्रफुल को आईवीआरआई स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से वैज्ञानिक पद्धति और सुझाव भी दिए गए। जिसको अपनाकर मंडल में पहली बार फूलों की खेती कर शौक को व्यवसाय में परिवर्तित किया है। इस दौरान फूलों की खेती के लिए इजरायल की तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
प्रफुल अग्रवाल(26) ने वर्ष 2016 में एक एकड़ की जमीन पर गुलाब की खेती करना शुरु की। प्रफुल बताते हैं कि बेंगलुरू, पुणे में पॉलीहाउस की खेती देखकर फूलों की खेती करने का निर्णय लिया। उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से पालीहाउस के बारे में जानकारी जुटाना शुरु की। इस दौरान पौध लगाने से लेकर कंटिंग, खाद आदि बिंदुओं को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र में लगने वाले प्रशिक्षण शिविर में अध्ययन किया। इस दौरान पहली बार खेती में 800 फूल प्रतिदिन का उत्पादन रहा। जिसको दिल्ली व लखनऊ की फूल मंडियो में ब्रिकी किया गया।
उन्होंने बताया कि मंडल में जागरूकता की कमी के चलते फूलों की खेती पर किसान जोर नहीं देते, जबकि कम लागत में अधिक लाभ के लिए फूलों की खेती बेहद अच्छा विकल्प है। उन्होंने बताया की बरेली में डेकोरेशन व टेंट वालों की मांग पर उन्होंने गुलाब की खेती के बाद जरबेरा की खेती करने का निर्णय किया। इस दौरान उन्होंने एक एकड़ में जरबेरा की खेती की। उन्होंने बताया कि गुलाब व जरबेरा के साथ ही वे ग्लाइडोलियस, सीजनल पौधे समेत इनडोर, आउटडोर पौधे की खेती भी करते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के बागबानी विशेषज्ञ डा. रंजीत सिंह ने बताया कि इजरायली तकनीक के लिए पालीहाउस के अंदर जलवायु के कारक जैसे तापतान, आर्द्रता, सूर्य का प्रकाश, कार्बन डाई ऑक्साइड का प्रतिशत, उसको पूरी तरह फसल के अनुरुप नियंत्रित रखा जाता है। इसके अलावा ड्रिप सिंचाई प्रणाली की ओर से पानी को एक स्रोत से पौधे की जड़ तक बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है।
इसी इजरायली प्रणाली में आवश्यक उवर्रक व अन्य रसायन भी प्रदान किए जाते हैं। जिसको फर्टिगेशन कहते हैं। जिससे उत्पादन क्षमता लगभग 10 गुणा बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि नियंत्रित वातावरण होने के चलते कीट व बीमारियों का प्रकोप बेहद कम हो जाता है। वहीं, किसान की लागत में बढ़ोतरी के साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता अधिक होती है।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से लगातार किसानों की आय बढ़ोतरी को लेकर प्रशिक्षण क्रियाकलापों का आयोजन होता रहता है। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ ही व्यवसयिक सुझाव भी उपलबघ कराए जाते हैं। -डा. वीपी सिंह, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र, आईवीआरआई
