नवरात्रि विशेष: 100 परिवारों को बिखरने से बचा चुकी हैं जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया, बनीं मिसाल

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हल्द्वानी, अमृत विचार। मां चंद्रघंटा एकाग्रता का प्रतीक हैं। कुष्मांडा का अर्थ होता है ऊर्जा। यह दोनों ही शक्ति किसी में विद्यमान हो तो हर लक्ष्य को पाना उसके लिए मुश्किल नहीं होगा। कुछ ऐसे ही स्वभाव के साथ अपने सपने को साकार करने में जुटी जिले की मुखिया बेला तोलिया पहाड़ का पलायन रोकना …

हल्द्वानी, अमृत विचार। मां चंद्रघंटा एकाग्रता का प्रतीक हैं। कुष्मांडा का अर्थ होता है ऊर्जा। यह दोनों ही शक्ति किसी में विद्यमान हो तो हर लक्ष्य को पाना उसके लिए मुश्किल नहीं होगा। कुछ ऐसे ही स्वभाव के साथ अपने सपने को साकार करने में जुटी जिले की मुखिया बेला तोलिया पहाड़ का पलायन रोकना चाहती हैं। इसके साथ ही बेला अब तक 100 से अधिक परिवारों को बिखरने से भी बचा चुकी हैं।

मां भगवती का पूजन करतीं जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया।

इक्कीस साल पहले इस उद्देश्य के लिए उत्तराखंड बना था, हकीकत में आज भी पूरा नहीं हो सका। यह विफलता तमाम पहाड़ प्रेमियों को कचोटता है। इस सपने को पूरा करने की हसरत पाल गृहिणी से नेत्री बनी श्रीमती तोलिया जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर रहकर साकार करने में जुटी हैं। पहाड़ का पलायन रोकने के लिए श्रीमती बेला ने कुछ बिंदु तैयार किए हैं। पहला बिंदु पहाड़ में स्वच्छता को कायम रखना है। इसके लिए वह एक बड़ा प्रोजेक्ट लाना चाहती हैं।

वह बताती हैं कि पहाड़ में यदि सुख सुविधाएं हो तो कोई भी तराई की ओर नहीं भागेगा। दूसरे बिंदु के रूप में बेहतर अस्पताल फिर चौड़ी सड़कें और बेहतर स्कूल को रखा है। लक्ष्य को पाने के प्रयास में जुटी बेला के लिए कोरोना चुनौती बना था। लेकिन उनकी एकाग्रता भंग नहीं हुई और अब फिर से वह पूरी ऊर्जा के साथ अपनी योजनाओं को शासन के माध्यम से पूरा करने का प्रयास कर रही हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया।

सौ परिवारों को बिखरने से बचा चुकी हैं बेला
सरकारी योजनाओं व खुद के प्रयासों से महिलाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहीं बेला तोलिया ने जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में सौ से भी ज्यादा परिवारों को बिखरने से बचाया है। पति पत्नी का कलह जब उन तक पहुंचता था तो वह दोनों को ग्रहस्थ जीवन के अनुभव के साथ समझाती थी। जो पति पत्नी एक दूसरे से अलग होने की ठान चुके थे, उनमें तमाम कभी न अलग होने की कसम के साथ घर वापस हुए। वर्ष 2008 में पहली बार बीडीसी, लायनेस क्लब व अन्य संस्थाओं से जुड़ी। बताती हैं कि दोनों ही जीवन में खुद को मजबूत करने में उनकी सास और पति का बड़ा सहयोग रहा है।

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