नैनीताल चिड़ियाघर में जानवरों के भूखे मरने की आई नौबत, सरकार से मांगा बजट
नैनीताल, अमृत विचार। सरकार ने भले ही चिडियाघर और नेशनल पार्क में 18 साल तक के युवाओं को फ्री एंट्री देने का निर्णय लिया हो लेकिन नैनीताल जू में बजट के अभाव में जानवरों का भोजन जुटाने की दिक्कत बन पड़ी हैं। जिसके बाद नैनीताल प्राणी उद्यान प्रबंधन ने सरकार को जानवरों के खाने पीने …
नैनीताल, अमृत विचार। सरकार ने भले ही चिडियाघर और नेशनल पार्क में 18 साल तक के युवाओं को फ्री एंट्री देने का निर्णय लिया हो लेकिन नैनीताल जू में बजट के अभाव में जानवरों का भोजन जुटाने की दिक्कत बन पड़ी हैं। जिसके बाद नैनीताल प्राणी उद्यान प्रबंधन ने सरकार को जानवरों के खाने पीने के साथ जू कीपरों की सैलरी व जानवरों के मेडिकल सुविधाओं के लिए बजट की मांग की है।
इन सब के लिए जू प्रबंधन ने 60 से 65 लाख की धनराशि देने की मांग सरकार से की है ताकि मार्च तक चिडियाघर के खर्चे पूरे हो सकें। दरअसल नैनीताल जू में टिकट से 36 कर्मचारियों की सैलरी और जानवरों के खाने का खर्चा निकलता था लेकिन कोरोना के बाद से ही पर्यटकों की कमी से आर्थिक संकट बना हुआ है। हालांकि चिड़ियाघर में 219 पशु-पक्षी हैं जिनके खाने और रखरखाव में 15 लाख रुपये महीना खर्च होता है। इन जानवरों और पक्षियों के लिए हरी सब्जियां,गेहूं बाजरा,गांजर, मुर्गीदाना के साथ रोजाना 55 किलो मीट और अण्डों की खपत होती है। साथ ही कैल्शियम प्रोटीन समेत अन्य दवा भी जू प्रबंधन को चाहिए होती हैं।
नैनीताल जू के रेंजर अजय रावत ने बताया कि पिछले सालों में कोरोना के बाद लगातार पर्यटकों की संख्या में कमी आई है जिसके चलते टिकट से कमाई कम हुई है। अब फिर सरकार को 60 लाख के आसपास का बजट भेजा गया है अगर पैसा मिलेगा तो मार्च तक की दिक्कतें दूर हो जाएंगी। और जानवरों के लिए चारा और कर्मचारियों की सैलरी भी मिल सकेगी।

