कोयला न आने से दो नंबर यूनिट पर छाया संकट, लगातार गिर रहा विद्युत उत्पादन

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रायबरेली। पूरे देश के तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले की कमी से उत्पादन घटकर आधा हो गया है। इस वजह से प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में छह घंटे की और नगरीय क्षेत्रों में दो घंटे की अतिरिक्त बिजली कटौती हो रही है। वहीं कोयले की कमी से जूझ रही एनटीपीसी की यूनिट नंबर दो पर …

रायबरेली। पूरे देश के तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले की कमी से उत्पादन घटकर आधा हो गया है। इस वजह से प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में छह घंटे की और नगरीय क्षेत्रों में दो घंटे की अतिरिक्त बिजली कटौती हो रही है। वहीं कोयले की कमी से जूझ रही एनटीपीसी की यूनिट नंबर दो पर भी संकट मंडरा रहा है। यह यूनिट क्षमता से 55 फीसद नीचे चल रही है, लेकिन अधिकारी अभी यूनिट को बंद करने से इंकार कर रहे हैं।

एनटीपीसी में अगस्त महीने से ही कोयले का संकट बना हुआ है। इस कारण 1450 मेगावाट का संयंत्र बिजली उत्पादन में पीछे रह गया। ये वही संयंत्र है जिससे आठ राज्यों को बिजली की आपूर्ति होती है।

कोयले का भंडारण एनटीपीसी में घटकर 16 हजार मिट्रिक टन रह गया है जबकि इसकी भंडारण क्षमता 7 लाख 50 हजार मिट्रिक टन है। उत्तरी करनपुर से कोयला एनटीपीसी को पहुंचाया जाता है, लेकिन अगस्त से उत्तरी करनपुर से लोड नहीं आ रहा है।

झारखंड के अन्य जिलों से कोयला भेजा जाता रहा है। यह कोयला गीला होने से 11 लाख सेल्सियस का तापमान नहीं मिल पा रहा। जिसकी वजह से टरबाइन के साथ ब्वायलर पूरी क्षमता से नहीं चल रहे हैं। इस कारण बिजली का उत्पादन कम हो रहा है।

कम उत्पादन के कारण बीते बुधवार को यूनिट छह को बंद कर दिया गया था। वहीं अब खतरा यूनिट दो पर मंडरा रहा है। 210 मेगावाट की यह यूनिट 55 फीसद बिजली का उत्पादन कर रही है। बीते तीन दिन में इसका उत्पादन तीन फीसदी गिर गया है। इस यूनिट से जम्मू, हरियाणा को अधिक बिजली आपूर्ति होती है।

एनटीपीसी की जन संपर्क अधिकारी कोमल शर्मा का कहना है कि अभी किसी अन्य यूनिट को बंद करने की कोई योजना नहीं है। दिक्कत कोयले की है लेकिन संसाधन जुटाकर चार यूनिट को चलाया जा रहा है।

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