यूपी चुनाव: मायावती ने की मतदान से पहले सर्वे पर रोक लगाने की मांग, जानें क्या कहा
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो ने विरोधी दलों को आड़े हाथ लिया है। बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित एक जनसभा में उन्होंने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने चुनाव से पहले सर्वे पर रोक लगाने की मांग की है। मायावती ने कहा कि यूपी में जब बसपा की 2007 में सरकार …
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो ने विरोधी दलों को आड़े हाथ लिया है। बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित एक जनसभा में उन्होंने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने चुनाव से पहले सर्वे पर रोक लगाने की मांग की है। मायावती ने कहा कि यूपी में जब बसपा की 2007 में सरकार बनी थी।
तब हमने यहां प्रदेश और आम जनता के लिए युद्ध स्तर पर चौतरफा विकास किया था। प्रदेश में बेहतरीन कानून व्यवस्था दी थी, जिसकी पूरे देश में सराहना की गई थी। लेकिन ये सब विरोधियों को अच्छा नहीं लगा। तब से यहां जातिवादी, संकीर्ण और पूंजीवादी पार्टियां एकजुट होकर बसपा को सत्ता में आने से रोकने में लगी है। इस वजह से बीते दो विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी सरकार नहीं बना पाई।
चुनावी सर्वे पर लगे रोक
मायावती ने आगे कहा कि चुनाव घोषित होने से कुछ समय पहले व वोटिंग होने तक भी हमारी पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए या बसपा के विरुद्ध प्रायोजित मीडिया भी हमारी स्थिति को जानबूझकर काफी कमजोकर दर्शाता रहेगा। जिससे पार्टी के लोगों को गुमराह नहीं होना है। इसको लेकर मुख्य चुनाव आयोग को एक चिट्ठी लिखेंगे कि किसी भी राज्य में जब चुनाव के लिए 6 महीने रह जाए तो तब से लेकर वोटिंग तक सभी एजेंसी के सर्वे पर रोक लगे। ताकि चुनाव प्रभावित नहीं हो सके।
सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही BJP
मायावती ने आगे कहा कि चुनाव के नजदीक बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकार अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है। हो सकता है कि जब इससे भी इनका काम नहीं चलने वाला तो तब ये पार्टी आखिर में इस चुनाव को किसी भी मामले में हिंदू मुस्लिम सांप्रादियक रंग देकर फायदा उठाने का पूरा प्रयास कर सकती है।
किसानों का उत्पीड़न कर रही सरकार
मायावती ने ये भी कहा कि पूरे देश के किसान केंद्र के बनाए गए तीनों कानूनों को लेकर अभी तक आक्रोशित है। आंदोलित किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। मामले में लखीमपुर खीरी की घटना ताजा उदाहरण है। इसके अलावा ये पार्टी चुनाव के दौरान कोरोना नियमों के आड़ में हमारी पार्टी के लोगों को परेशान कर सकती है। इसे ध्यान में रखकर लोगों को कोरोना नियमों का पालन करना है।
