हल्द्वानी: बीमारी के दर्द और कर्ज के बोझ से टूटी जिंदगी की डोर
हल्द्वानी, अमृत विचार। रविवार का दिन तो ठीक गुजरा, लेकिन ढलती शाम के साथ स्याह होती रात कई परिवारों पर भारी गुजरी। किसी ने जहर खाया तो किसी ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला का दु:खद अंत कर दिया। लगा कि मौत से सारी परेशानी एक झटके में खत्म हो जाएगी, लेकिन ऐसा होता नहीं। अब मरने …
हल्द्वानी, अमृत विचार। रविवार का दिन तो ठीक गुजरा, लेकिन ढलती शाम के साथ स्याह होती रात कई परिवारों पर भारी गुजरी। किसी ने जहर खाया तो किसी ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला का दु:खद अंत कर दिया। लगा कि मौत से सारी परेशानी एक झटके में खत्म हो जाएगी, लेकिन ऐसा होता नहीं।
अब मरने वालों के हिस्से की परेशानी उनके अपनों के कंधों पर है। किसी के बच्चे अभी नासमझ हैं और सामने पूरी जिंदगी पड़ी है, तो किसी का पति अपने पीछे दो-दो बेटियों का बोझ पत्नी के सिर पर छोड़कर चल बसा। ऐसे चार परिवारों पर रविवार की रात भारी थी। मातमी शोर से कलेजा फटा जा रहा था और अफसोस के सिवा कहने को किसी के पास कुछ और नहीं था।
