कार्रवाई का भरोसा

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Edited By Amrit Vichar
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जम्मू-कश्मीर में पिछले एक महीने से जिस तरह आतंकी घटनाएं बढ़ रही हैं, वो चिंताजनक हैं। जम्मू कश्मीर के पुंछ में नौ दिनों से जारी मुठभेड़ में सेना के दो जूनियर कमीशन अधिकारियों सहित नौ सैनिक शहीद हो चुके हैं और सेना अध्यक्ष जनरल भी केन्द्र शासित प्रदेश के दो दिन के दौरे पर गए …

जम्मू-कश्मीर में पिछले एक महीने से जिस तरह आतंकी घटनाएं बढ़ रही हैं, वो चिंताजनक हैं। जम्मू कश्मीर के पुंछ में नौ दिनों से जारी मुठभेड़ में सेना के दो जूनियर कमीशन अधिकारियों सहित नौ सैनिक शहीद हो चुके हैं और सेना अध्यक्ष जनरल भी केन्द्र शासित प्रदेश के दो दिन के दौरे पर गए हुए हैं। इसके अलावा केन्द्र शासित प्रदेश में आतंकवादियों ने नागरिकों की हत्या करके भी सुरक्षा के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। अब तक करीब 11 नागरिकों की जान जा चुकी है। मंगलवार को सेना प्रमुख ने एमएम नरवणे ने जम्मू में नियंत्रण रेखा के अग्रिम इलाकों का दौरा किया और क्षेत्र में जमीनी स्थिति तथा वहां चल रहे घुसपैठ रोधी अभियानों की जानकारी ली।

जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने के साथ मोदी जी ने अनुच्छेद 370 और धारा 35 एक समाप्त कर दी थी। उस वक्त केंद्र सरकार ने दावा किया था कि इससे आतंकवाद पर रोक लगेगी। कुछ ऐसा ही दावा नोटबंदी के वक्त भी किया गया था। लेकिन जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी अब भी जहां चाहे वहां आम लोगों को, सैनिकों को अपने निशाने पर ले रहे हैं। इस बीच खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पेशल ऑपरेशन के लिए एक टीम कश्मीर भेजी है जो आतंकियों का खात्मा करेगी।

अच्छी बात है कि केंद्र सरकार आतंकवाद खत्म करने के लिए कदम उठा रही है। सरकार को जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए उपाय करने होंगे। युवाओं को सशस्त्र बलों में भर्ती होने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सेना ने जम्मू कश्मीर और हिमाचल के 100 गांवों के लिए साइकिल रैली रवाना की।

गृहमंत्री अमित शाह 23 एवं 24 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर के दौरे पर जा रहे हैं। हाल ही में श्री शाह ने कहा था कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद फैलाने वाली ताकतों के ठिकानों पर पुन: सर्जिकल स्ट्राइक का विकल्प खुला हुआ है। साफ है कि इस दौरे के पहले सरकार आतंकवादियों एवं उन्हें सीमापार से शह देने वाली ताकतों को साफ एवं सख्त संदेश देना चाहती है।

जबकि विरोधी दलों का आरोप है कि जम्मू कश्मीर में हिंसा की बढ़ रही घटनाओं से साफ है कि कश्मीर को लेकर सरकार की स्पष्ट नीति नहीं है और वहां हिंसा कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही है। जबकि सरकार का कहना है ऐसे मामलों पर सियासत देश को कमजोर करने की साजिश है। ऐसे समय में देश को एकजुट होना चाहिए।