आठ फीट चौड़े तटबंध ने बचा लिया हल्द्वानी और काठगोदाम
नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। गौला के बहाव की वजह से रेलवे स्टेशन की पटरियां नदी में समा गईं। रात के समय हुए भारी भूस्खलन के बाद स्थिति बिगड़ती चली गई। नदी का बहाव इतना तेज था कि उसके रास्ते में जो भी आ रहा था, वह उसमें समा जा रहा था। गनीमत रही है कि …
नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। गौला के बहाव की वजह से रेलवे स्टेशन की पटरियां नदी में समा गईं। रात के समय हुए भारी भूस्खलन के बाद स्थिति बिगड़ती चली गई। नदी का बहाव इतना तेज था कि उसके रास्ते में जो भी आ रहा था, वह उसमें समा जा रहा था। गनीमत रही है कि जिस पहाड़ी पर भूस्खलन हुआ, उसका कुछ हिस्सा गौला में समाने से बच गया। इस वजह से नदी का पानी काठगोदाम और हल्द्वानी में आने से रूक गया।

हल्द्वानी और काठगोदाम के लिए गौला नदी लाइफ लाइन है। इस नदी के पानी से जहां हजारों लोगों की प्यास बुझती है वहीं दूसरी ओर नदी में होने वाले खनन से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। 19 अक्टूबर को नदी के बहाव की वजह से शीशमहल क्षेत्र में गौला के तटबंध में कटान होने लगा। करीब 30 फीट से ज्यादा का भूकटान तेजी के साथ होने लगा। इसके बाद यहां तटबंध केवल आठ फीट का बचा। अगर नदी इस तटबंध को भी काट देती तो गौला का पानी हल्द्वानी और काठगोदाम में घुस सकता था। कटान बढ़ता तो नैनीताल राजमार्ग भी इसकी जद में आ जाता।
नदी के पास रहने वाले घबराए
गौला नदी के पास रहने वाले हजारों परिवार खतरे की जद में हैं। मंगलवार को पानी का बहाव बढ़ता जा रहा था। पुलिस टीम लगातार लोगों को सतर्क रहने को कह रही थी। यहां रहने वाले लोग जागकर रातें काट रहे हैं।
