हल्द्वानी: 18 साल की उम्र में दो बार दगा दे गया गौला पुल, गुणवत्ता पर उठे सवाल
यतीश शर्मा, हल्द्वानी। लाइफ लाइन कहे जाने वाला गौला पुल 18 साल में दो बार दगा दे चुका है। 13 साल पहले भी इस पुल पर संकट आ चुका, जिसमें काफी नुकसान हुआ था। उसके बाद फिर इस पुल का एक बड़ा हिस्सा बह गया। हजारों वाहनों और तमाम इलाकों के लोगों को साधने वाले …
यतीश शर्मा, हल्द्वानी। लाइफ लाइन कहे जाने वाला गौला पुल 18 साल में दो बार दगा दे चुका है। 13 साल पहले भी इस पुल पर संकट आ चुका, जिसमें काफी नुकसान हुआ था। उसके बाद फिर इस पुल का एक बड़ा हिस्सा बह गया। हजारों वाहनों और तमाम इलाकों के लोगों को साधने वाले इस पुल की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो उच्चाधिकारी इसको लेकर एक जांच भी बैठा सकते है, हालांकि अभी इस कार्रवाई पर कोई खुलासा नहीं किया गया है।

लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बनभूलपुरा क्षेत्र का गौला पुल वर्ष 2003 में तैयार हुआ था। उस वक्त यह पुल 365 मीटर लंबा बनाया गया था। इस पुल को बनाने में 16 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। उसके बाद इस पुल को लोगों के आवागमन के लिए चालू कर दिया गया। लेकिन यह पुल पांच साल भी लोगों का बोझ नहीं सह सका और जुलाई वर्ष 2008 में क्षतिग्रस्त हो गया।
बताया जाता है कि उस वक्त भी पुल का कुछ हिस्सा नदी में बह गया था। उसके बाद 2018 में पुल में दरार आ गई। कई बार पुल की सुरक्षा दीवारों के सरिए भी देखे गए। दीवार के बहने और उसके कमजोर पड़ने की दशा भी सुर्खियों में रही। लेकिन जिम्मेदार विभाग ने पुल के रखरखाव पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और फिर 18 साल बाद मंगलवार को पुल फिर से क्षतिग्रस्त हो गया। इस बार इस पुल 30 मीटर हिस्सा टूटकर बह गया। विभागीय सूत्रों की माने तो पुल को लेकर जांच होती है तो इस मामले में लोनिवि, एनएचएआई और खनन विभाग से जुड़े कई जिम्मेदारों को आड़े हाथों लिया जा सकता है।
एक महीने से ज्यादा समय तक पुल पर नहीं दौड़ेगा यातायात
गौला पुल पर दोबारा से आवागमन चालू होने में एक महीने से भी ज्यादा का वक्त लग सकता है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक योगेंद्र शर्मा ने बताया कि पुल का कोई पिलर नहीं बहा है। केवल एक हिस्सा ही क्षतिग्रस्त हुआ है। बारिश रुकने के बाद जब काम शुरू होगा तो कम से कम 20 दिन पुल को ठीक करने में लगेंगे। उसके बाद पुल का निरीक्षण होगा और फिर शासन से अनुमति मिलने के बाद इसे लोगों के लिए पुन: चालू किया जा सकेगा।
रोजाना पांच हजार से अधिक वाहनों का होता है आवागमन
परियोजना निदेशक योगेंद्र शर्मा ने बताया कि इस पुल पर प्रतिदिनि पांच हजार से ज्यादा वाहनों का आवागमन रहता है। गौला पुल से पर्वतीय इलाकों के साथ-साथ खटीमा, चोरगलिया, सितारगंज समेत यूपी के कई शहरों के लोग आवागमन के लिए इस्तेमाल करते हैं।
कमजोर होने के ये हो सकते हैं कारण
– खनन में मानकों का ख्याल न करना
– पुल निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान न रखना
– नियमानुसार रखरखाव न होना
