रायबरेली: एनटीपीसी ने कोयले की राख देने से किया इंकार, पूर्वांचल एक्सप्रेस निर्माण कार्य हुआ प्रभावित

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रायबरेली। प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पूर्वांचल एक्सप्रेस के निर्माण पर अब संकट खड़ा हो गया है। एनटीपीसी परियोजना से निकलने वाले कोयले की राख को प्रबंधन ने एनएच के ठेकेदारों को देना बंद कर दिया है। एनटीपीसी से निकलने वाली कोयले की राख को पाइप लाइन के सहारे अरखा गांव के पास गंगा नदी …

रायबरेली। प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पूर्वांचल एक्सप्रेस के निर्माण पर अब संकट खड़ा हो गया है। एनटीपीसी परियोजना से निकलने वाले कोयले की राख को प्रबंधन ने एनएच के ठेकेदारों को देना बंद कर दिया है।

एनटीपीसी से निकलने वाली कोयले की राख को पाइप लाइन के सहारे अरखा गांव के पास गंगा नदी के तट पर बने ऐश पॉन्ड में भरा जाता है। इसके बाद इस राख को सड़क बनाने वाली कंपनियों और ठेकेदारों को मुफ्त में दे दिया जाता था, लेकिन अब प्रबंधन ने राख देने से इंकार कर दिया है।

बता दें की एनटीपीसी ऊंचाहार में विद्युत उत्पादन की छह इकाइयां बनाई गई हैं। जिसमें एक से लेकर पांच नंबर तक 210 मेगा वाट तो वहीं छठीं 500 मेगा वाट उत्पादन क्षमता वाली इकाई बनाई गई हैं। जिन्हें पानी और कोयले से संचालित कर विद्युत उत्पादन किया जाता है। इस तरह रोजाना करीब 18 से 19 हजार मैट्रिक टन कोयले की खपत होती है।

वहीं बिजली उत्पादन के बाद निकलने वाली राख को पाइप लाइन के सहारे अरखा और उमरन के रायपुर गांव के पास बने ऐश पॉन्ड में एकत्रित किया जाता है। जहां पाइप से निकलने वाली अच्छी राख को सीमेंट बनाने वाली तमाम कंपनियों को बेचा जाता है, लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है।

असल में जब से सरकार ने मिट्टी खनन पर रोक लगा दी है तब से एनएच और अन्य सड़क बनाने वाली कंपनियां कोयले की राख को सड़क की निचली लेयर बनाने में उपयोग करने लगी है। इसी वजह से पूर्वांचल एक्सप्रेस, लखनऊ-रायबरेली, सुल्तानपुर-कानपुर-वाराणसी मार्ग और प्रयागराज-बुंदेलखंड मार्ग में भराई का कार्य प्रभावित होने लगा है। खासकर की भराई का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

कोयले की राख से आमदनी की रणनीति

एनटीपीसी के कोयले की राख को लेकर हमेशा से ठेकेदारों के बीच विवाद होता रहता है। वहीं मिट्टी खनन पर रोक लगने से एनटीपीसी की राख कीमती हो गई है। ऐसे में एनटीपीसी प्रबंधन अब राख को बेचने की योजना बना रहे है। सूत्रों के अनुसार हाईकमान से निर्णय होने के बाद ही राख उठाने का टेंडर पास होगा।

वहां इस मामले पर एनटीपीसी परियोजना के मुख्य प्रबंधक कमलेश सोनी का कहना है कि मुफ्त राख देने का काम बंद कर दिया गया है। अब सरकार के निर्देशों के अनुसार बैठक के बाद ही निर्धारण किया जाएगा।

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