पीलीभीत: 7 माह पहले बना पुल एक ही बरसात में हुआ धराशाई, दुर्घटना का खतरा
दियोरिया कला, अमृत विचार। सात माह पहले क्षेत्र के गांव ढकिया रंजीत में करोड़ों रुपये की लागत से बने माला नदी के पुल की रेलिंग एक ही बरसात में दोनों तरफ से धराशायी हो गई। इसके बाद पुल से गुजरने वाले वाहनों से दुर्घटना का खतरा है। पुल की रेलिंग गिरने से यात्रियों का आवागमन …
दियोरिया कला, अमृत विचार। सात माह पहले क्षेत्र के गांव ढकिया रंजीत में करोड़ों रुपये की लागत से बने माला नदी के पुल की रेलिंग एक ही बरसात में दोनों तरफ से धराशायी हो गई। इसके बाद पुल से गुजरने वाले वाहनों से दुर्घटना का खतरा है। पुल की रेलिंग गिरने से यात्रियों का आवागमन प्रभावित है। पुल निर्माण होने के मात्र 250 दिन के अंदर दोनों साइड की रेलिंग का धराशायी होने से गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों ने ध्वस्त रेलिंग की मरम्मत कराने की मांग क्षेत्रीय विधायक से की है। सेतु निगम की ओर से माला नदी पर पुल का निर्माण 2019-20 में प्रारंभ किया गया था। उसके बाद पुल का लोकार्पण मार्च-21 में विधायक रामसरन वर्मा ने कर दिया। तब विधायक रामसरन वर्मा ने स्वीकृति से लेकर निर्माण कराने तक का पूरा श्रेय लेते हुए पुल जनता को समर्पित किया था और खूब वाहवाही लूटी थी।
मगर, मानक के अनुरूप निर्माण न होने से माला नदी का पुल एक भी बारिश ठीक से नहीं सहन कर पाया और मात्र सात माह में ही ढहने लगा। हालत यह है कि 48 घंटे की बारिश में ही पुल के दोनों तरफ की साइड की रेलिंग ध्वस्त हो चुकी है। पुल के बीचो बीच सड़क धंसने से गहरा गड्ढा हो चुका है। अब ग्रामीण विधायक की ईमानदारी पर भी सवाल उठाने लगे हैं। हालांकि पुल की रेलिंग टूटने की सूचना मिलने पर विधायक ने उसे दोबारा ठीक कराने का आश्वासन दिया है।
बिना रोलर चलाए ही बना दी रेलिंग
माला नदी पर सात महीने पहले बने पुल की रेलिंग बनाने में ठेकेदार ने जल्दबाजी दिखाकर केवल खानापूरी कर दी। ग्रामीणों ने बताया कि पुल बनाने वाला ठेकेदार बिना रोलर चलाए ही रेलिंग बनाकर चला गया। इस वजह से बरसात में किनारे की मिट्टी दब गई और रेलिंग ध्वस्त हो गई है। पुल की सड़क पर भी दरार पड़ गयी है। इससे सड़क पर गुजरने वाले वाहनों से दुर्घटना का खतरा पैदा हो गया है।
गांव ढकिया रंजीत के समीप बहने वाली माला नदी पर लंबे समय से पुल नहीं था। ग्रामीणों ने नदी पर पुल बनवाने की मांग की। कई बार ग्रामीणों ने विधायक रामसरन वर्मा ने शासन से पुल बनवाने का आग्रह किया था। शासन ने वर्ष 2019-20 की कार्य योजना में पुल निर्माण की स्वीकृति दी थी। उसके बाद बजट भी जारी कर दिया गया। पुल का निर्माण वर्ष 2021 में पूरा हो पाया। मार्च-21 में विधायक ने पुल का लोकार्पण किया।
खानापूरी करके भागा ठेकेदार
ठेकेदार ने आनन फानन में पुल का निर्माण कराया था। पुल के दोनों तरफ की रेलिंग और मार्ग भी जल्दबाजी में बनवाकर खानापूरी कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार ने पुल पर ताजा मिट्टी डाली। उसके बाद उस मिट्टी पर बिना रोलर चलाए रेलिंग और सड़क बना दी। यह निर्धारित मानक की गुणवत्ता के अनुरूप नहीं थी। इसलिए ही सात महीने में सड़क और रेलिंग दोनों ध्वस्त हो गए। कुछ ग्रामीण पुल की रेलिंग ध्वस्त होने की सूचना लेकर विधायक रामसरन वर्मा को देने गए तो उन्होंने उसे ठीक कराने का आश्वासन दिया।
