पीलीभीत: कृषि भवन के बाहर किसान नेताओं का धरना, अफसरों से नोकझोंक
पीलीभीत, अमृत विचार। लखीमपुर कांड में आरोपी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी की गिरफ्तारी और मंत्री पद से बर्खास्तगी की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। तय कार्यक्रम के तहत उन्हें डीएम का घेराव और वहीं पर धरना प्रदर्शन करना था। मगर सुरक्षा के कड़े …
पीलीभीत, अमृत विचार। लखीमपुर कांड में आरोपी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी की गिरफ्तारी और मंत्री पद से बर्खास्तगी की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। तय कार्यक्रम के तहत उन्हें डीएम का घेराव और वहीं पर धरना प्रदर्शन करना था। मगर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के चलते डीएम कार्यालय तक नहीं पहुंच सके। अफसरों ने भारी पुलिस बल और बैरियर लगाकर उन्हें कृषि भवन के पास ही रोक लिया।
काफी देर तक किसान नेताओं से तीखी बहस होती रही। मगर, डीएम कार्यालय तक जाने की अनुमति नहीं मिल सकी। इस पर कृषि भवन के बाहर ही जमीन पर बैठकर किसानों ने धरना देकर नारेबाजी की। स्थानीय मुद्दों पर प्रशासन और सरकार को घेरा। अंत में अपनी मांगों का ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को देकर किसान नेता लौट गए। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर छावनी में तब्दील दिखा।
संयुक्त किसान मोर्चा के डीएम कार्यालय पर पहुंचकर घेराव और धरना प्रदर्शन की सूचना पहले से थी। इसे लेकर मंगलवार को सुबह से ही कलेक्ट्रेट के दोनों रास्तों पर गेट पर ही पुलिस बैरियर लगाकर तैनात हो गई थी। कई थानों की पुलिस लगाई गई थी। पूर्वान्ह करीब दस बजे किसान नेताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पहले कलेक्ट्रेट जाने वाले मुख्य गेट पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। किसान नेताओं ने काफी बहस की, मगर उन्हें उस मार्ग से प्रवेश नहीं दिया।
गांधी सभागार होते हुए दूसरे रास्ते से जाने की बात कह दी गई थी। उधर, पहले से ही सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार सिंह, सीओ सिटी सुनील दत्त, सीओ सदर लल्लन सिंह, कोतवाल अशोक पाल, इंस्पेक्टर सुनगढी श्रीकांत द्विवेदी, बरखेड़ा इंस्पेक्टर धीरज सिंह सोलंकी बैरियर लगाकर पुलिस बल के साथ मौजूद थे। किसान नेताओं के पहुंचते ही अधिकारियों और पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया और कृषि भवन में धरना प्रदर्शन करने को कह दिया। इसका किसान नेताओं ने विरोध कर दिया।
उनका कहना था कि डीएम कार्यालय के बाहर धरने का आवाहन है। वह वहीं पर धरना देंगे। तीखी नोकझोंक अधिकारियों से हुई। मगर, किसान नेताओं को आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर उन्होंने पुलिस के बैरियर के दूसरी तरफ कृषि भवन के बाहर ही धरना शुरू कर दिया। अफसरों के इस तरह रोकने पर भी सवाल उठाए। शाम को चार बजे के बाद अपनी मांगों का ज्ञापन दिया।
पराली जली तो एसडीएम-लेखपाल पर कार्रवाई क्यों नहीं
प्रदर्शन में स्थानीय मुद्दों पर भी बात की गई। किसान नेताओं का कहना था कि पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ मुदकमे दर्ज किए जा रहे हैं। उनके बच्चों के शस्त्र लाइसेंस और पासपोर्ट के निरस्तीकरण को भी प्रशासन नोटिस भेज चुका है। प्रशासन पराली को गोशाला भिजवाने की अपील करता है।मगर, पराली गोशाला तक पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
दर्जनों गांवों में किसानों की पराली खेत के बाहर डाल दी गई। उसे प्रशासन उठवा नहीं सका। कोई जिम्मेदारी से काम करने को तैयार नहीं। यह भी कहा कि पराली न जले, इसकी जिम्मेदारी एसडीएम-लेखपाल की है।फिर अगर कहीं पराली जली तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं? कहा कि ईमानदार हाेना अच्छी बात है। मगर, गलत काम को ईमानदारी से किया जाना, सही नहीं कहा जा सकता। एक दिन पहले पूरनपुर में किसान नेता का माेबाइल छीने जाने काे भी अफसरों की तानाशाही बताया।
किसान पर सीधे कार्रवाई, घूस लेने वालों को छोड़ दिया
एक दिन पहले पूरनपुर में किसान ने विजिलेंस टीम के अंदाज में आरएफसी प्रथम क्रय केंद्र के सहायक विपणन की रिश्वतखोरी पकड़ी थी। इसे लेकर काफी हंगामा भी हुआ था। उसे डीएम ने निलंबित कर दिया था। मगर, उस पर कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसे लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि किसान ने रिश्चतखोरी पकड़ी, उसके बाद उन्हीं को धमकाने का काम अफसरों ने किया।किसान पराली जलाए तो मुकदमा, कर्मचारी घूस लेते पकड़े गए तो कोतवाली से ऐसे ही छोड़ दिया गया।
इसे दोहरी नीति करार दिया। ये भी कहा कि बाढ़ में किसान तबाह हो गया। सर्वे कागजों में चल रहा है। धान का वाजिब दाम तक क्रय केंद्र पर नहीं मिल रहा। डीजल की कीमतें आसमान छू रही। कहा कि बुवाई के समय खाद के अभी से लाले हैं। सरकार की शहर पर प्रशासन किसान को दबाने में जुटा है। यह भी कहा कि घूसखोरी पकड़ने वालों के खिलाफ ही पूरनपुर में धरना शुरू करा दिया गया। इसे भी कुछ अफसरों की साजिश करार दिया।
