बाराबंकी: अपमिश्रण खाद्य सामग्री खाने पर मजबूर नगरवासी, आंख बंद करके बैठा सरकारी विभाग

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Edited By Amrit Vichar
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बाराबंकी। त्योहारों के अवसर पर मिलावटखोरों की चांदी हो जाती है, वहीं विभाग की ओर से खाद्य सामग्री की नियमित जांच न होने की वजह से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं। शहर में मिलावटी खाद्य सामग्री खुलेआम बिक रही है वहीं विभाग आंख बंद करके बैठा है। जानकारी के अनुसार शहर के छाया चौराहा, घण्टाघर, …

बाराबंकी। त्योहारों के अवसर पर मिलावटखोरों की चांदी हो जाती है, वहीं विभाग की ओर से खाद्य सामग्री की नियमित जांच न होने की वजह से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं। शहर में मिलावटी खाद्य सामग्री खुलेआम बिक रही है वहीं विभाग आंख बंद करके बैठा है।

जानकारी के अनुसार शहर के छाया चौराहा, घण्टाघर, धनोखर चौराहा, नाका सतरिख, बस स्टाप, नाका पैसार, पल्हरी चौराहा, नबीगंज, सट्टी बाजार, रेलवे स्टेशन पर, हर जगह मिलावट ही मिलावट है। यहां तक डी.एम. आवास से लेकर छाया चौराहे, रेलवे स्टेशन, बस स्टाप तक कई जगह पुरानी मिठाईयां खुलेआम बेची जा रही है। किचन की सब्जी से लेकर तेल, मसालों में मिलावट तो जैसे बाजारों में आम हो गई है। मिठाईयों के खोवा व छेना पर भी संशय की ही स्थिति है।

इसपर आपूर्ति विभाग या स्वास्थ्य और फूड विभाग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई है। अब नतीजा यह है कि उपभोक्ताओं की जेब ही नहीं कट रही बल्कि उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी हो रहा है।

वहीं बाजार की स्थिति को ही देखें तो सब्जी को ताजा दिखाने के लिए रंगों का प्रयोग किया जाता है। वहीं सब्जियां मजबूरन लोगों को खरीदनी पड़ती है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

लोग इन्हीं मिलावटी खेल के बीच अपने दिन गुजार रहे हैं। इस संबंध में कई दुकानदारों से बात की गई तो उन्होंने से कहा कि जांच हो या न हो लेकिन त्योहारों में काजू कतली मुफ्त में देनी पड़ती है और पैसा हमको प्रतिमाह के हिसाब से देना पड़ता है। इसलिए हम विभाग की शह पर ही खुलेआम मिलावट करते है और जो पैसा माहवार देते हैं उसको हम लोग मिलावट करके ही वसूलते हैं।

अब देखना है कि क्या विभाग इसी तरह हाथ पर हाथ थरे बैठा रहेगा और गुपचुप वसूली करता रहेगा या आम जनता के जीवन के साथ हो रहे खिलवाड़ को बंद करेगा।

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