चिंता की बात

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Edited By Amrit Vichar
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जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर नजर रखने वाली एक संस्था की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु रिपोर्ट में कहा गया है कि जी20 देशों में जलवायु परिवर्तन से भारत के बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है और इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। रिपोर्ट गुरुवार को जारी की गई। साथ ही अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस इस्टीमेट रिपोर्ट में …

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर नजर रखने वाली एक संस्था की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु रिपोर्ट में कहा गया है कि जी20 देशों में जलवायु परिवर्तन से भारत के बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है और इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। रिपोर्ट गुरुवार को जारी की गई। साथ ही अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस इस्टीमेट रिपोर्ट में भारत को पाकिस्तान और अफगानिस्तान समेत उन 11 देशों में शामिल किया गया है, जो जलवायु परिवर्तन के लिहाज से चिंताजनक श्रेणी में माने गए हैं। इससे पहले जर्मनी वॉच ने ग्लोबल वार्मिंग के खतरों के बाबत जो सूची जारी की थी, उसमें भारत शीर्ष दस देशों में शामिल था।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अधिकांश भारतीय शहर वैश्विक औसत से अधिक तेजी से गर्म हो रहे हैं। कलकत्ता, दिल्ली और अन्य बड़े शहर भीषण गर्मी और अत्यधिक वर्षा के मामले में बेहद संवेदनशील हैं। चिंता की बात है कि एक अनुमान के अनुसार बीते साल से भारत को प्राकृतिक आपदाओं मसलन बेमौसमी बारिश, बाढ़, सूखे व चक्रवाती तूफानों की वजह से 87 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। जाहिर है विभिन्न देशों में हो रहे इस नुकसान में जलवायु परिवर्तन की बड़ी भूमिका है।

कमोबेश ऐसी ही प्राकृतिक आपदाएं इस साल अमेरिका व यूरोप के विकसित देशों ने भी महसूस की। जी20 रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से कृषि के लिए पानी की मांग बढ़ेगी, जबकि इसकी उपलब्धता कम होगी। यह चेतावनी देता है कि बिना किसी शमन के, जलवायु परिवर्तन हाल के दशकों में भारत में किए गए विकास के काम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन के खतरों को देखते हुए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

इन्हीं वैश्विक चिंताओं के बीच दुनिया के देश ब्रिटेन के ग्लासगो शहर में जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के उपायों पर विचार करने को एकत्र हो रहे हैं। 31 अक्टूबर से होने वाले ग्लासगो सम्मेलन में भाग लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं गए हुए हैं। पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक उत्सर्जन कटौती एजेंडा को आगे बढ़ाने की संभावना है। जानकारों के अनुसार भारत जैसे देशों के लिए सम्मेलन चुनौती पेश करेगा, क्योंकि इसमें बिजली उत्पादन में कोयले की निर्भरता खत्म करने पर बल दिया जाएगा।

भारत, चीन व अमेरिका इसका सर्वाधिक उपयोग करते हैं। हालांकि यह भी कोई छुपा तथ्य नहीं है कि भारत जैसे देशों के लिए उत्सर्जन कम करना आसान नहीं है। ऐसे में कोई भी बदलाव धीरे-धीरे ही किया जा सकता है। इसके अलावा इन बदलावों के आर्थिक पहलू की भी अनदेखी नहीं की जा सकती।