जीका पर सतर्कता
ब्राजील समेत कई दक्षिण अमेरिकी देशों के बाद जीका वायरस देश में पैर पसार रहा है। केरल के बाद अब यूपी में जीका के चार केस कानपुर में सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। रविवार को आला अधिकारियों के साथ बैठक …
ब्राजील समेत कई दक्षिण अमेरिकी देशों के बाद जीका वायरस देश में पैर पसार रहा है। केरल के बाद अब यूपी में जीका के चार केस कानपुर में सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। रविवार को आला अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने निगरानी कार्य को तत्परतापूर्वक किए जाने के निर्देश दिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जीका वायरस रोग मुख्य रूप से एडीज मच्छरों द्वारा फैलाए गए एक वायरस के कारण होता है, यह मच्छर दिन में काटता है।
जीका वायरस के संक्रमण या इससे जुड़ी बीमारियों का अभी तक कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। जीका वायरस एडीज (डेंगू) एजिप्टी, (मलेरिया) नाम के मच्छर के कारण फैलता है। ये वही मच्छर है जिसके कारण यैलो फीवर, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर नवजात बच्चों, गर्भ में पल रहे शिशु, शारीरिक रूप से कमजोर लोगों के अंदर देखा जाता है। इस वायरस के चलते लोग शारीरिक तौर से विकलांग हो सकते हैं। वायरस से संक्रमित अधिकांश लोगों में लक्षण विकसित नहीं होते हैं।
जीका का मामला पहली बार 1947 में अफ्रीका के युगांडा में दर्ज किया गया था। भारत में जीका की उपस्थिति 1960 के दशक से ही दर्ज की गई है, लेकिन यह वायरस आयसोलेट नहीं किया जा सका, जिस वजह से इसकी महामारी कारक उपस्थिति भी नहीं आंकी जा सकी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2017 में 86 देशों में जीका की उपस्थिति दर्ज की गई जिनमें भारत भी शामिल रहा। मच्छरों से बचाव ही जीका से सुरक्षा है। जरुरी है कि शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, फॉगिंग तथा एन्टी लार्वा का छिड़काव लगातार किया जाए। साथ ही संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए बचाव एवं जागरूकता कार्य को प्रभावी ढंग से जारी रखा जाए।
जीका की समय से पहचान करना एक बड़ी चुनौती है। चूंकि जीका के पांच में से एक मामले में ही थोड़े-बहुत लक्षण दिखाई देते हैं, खुद से इसका पता करना लगभग असंभव होता है। पहचान और निगरानी की चुनौतियों से निपटते हुए प्रयास करने होंगे कि आम लोगों में भय न पैदा हो। सिर्फ इसे नियंत्रित करने के उपायों पर ही ध्यान देने के साथ देश में सबसे अहम और बार-बार होने वाली मच्छर जनित बीमारियों मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया को लेकर भी गंभीर और सतत प्रयास करने होंगे।
यानि जीका के विशिष्ट लक्षणों और प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए इससे जूझने के लिए दूसरी मच्छर जनित बीमारियों के मुकाबले ज्यादा सघन उपाय करने की जरूरत है।
