अब डेंगू का वार

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना महामारी से उबरने के बाद देश में अब डेंगू पैर पसार रहा है। हरियाणा, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली तथा जम्मू एवं कश्मीर में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसने एक बार फिर देश के बुनियादी चिकित्सा ढांचे की लाचारगी को उजागर किया है। 31 अक्टूबर तक देश के …

कोरोना महामारी से उबरने के बाद देश में अब डेंगू पैर पसार रहा है। हरियाणा, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली तथा जम्मू एवं कश्मीर में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसने एक बार फिर देश के बुनियादी चिकित्सा ढांचे की लाचारगी को उजागर किया है। 31 अक्टूबर तक देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डेंगू के कुल 1,16,991 मामले सामने आ चुके हैं। कोविड संकट के बाद चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के जो दावे किए जा रहे थे, उसकी कलई खुलती नजर आ रही है, जिसका खमियाजा आम लोग भुगत रहे हैं।

अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों व तकनीशियनों की कमी है। ऐसे वक्त में जब मानसून की समाप्ति पर हर साल डेंगू का कहर बरपता है तो इसके लिए समय रहते तैयारी करनी चाहिए थी। बुधवार को केद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डेंगू के मामले अधिक आ रहे हैं, वहां फौरन सहायता पहुंचाने को कहा है। 31 अक्टूबर तक देश में डेंगू के कुल मामलों का 86 प्रतिशत इन्हीं नौ राज्यों में दर्ज किए गए हैं।

पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इस बार कुल 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस वर्ष डेंगू के मामले सबसे ज्यादा हैं। केंद्रीय दलों में राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और क्षेत्रीय कार्यालयों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

विशेषज्ञ नवंबर में डेंगू व जीका वायरस के संक्रमण बढ़ने की आशंका पहले ही जताते रहे है। इस समय का तापमान वायरस के लिए अनुकूल माना जाता है। सरकारों की दलील है कि इस बार मानसून देर से गया और पश्चिमी विक्षोभ के कारण देर तक बारिश होने से डेंगू मच्छर के प्रजनन के लिए वातावरण बना है। लेकिन इसके बावजूद हर साल फैलने वाली बीमारी को देखते हुए अतिरक्त सतर्कता बरतने की जरूरत थी।

जांच के लिए पर्याप्त लैबों का न होना और सरकारी अस्पतालों में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था मरीजों की मुश्किल बढ़ा रही है। समय पर रोग की पहचान न हो पाने के कारण प्लेटलेट में तेजी से गिरावट जानलेवा साबित हो रही है। ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की कमी बनी हुई है, जो हमारे स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी को ही उजागर कर रहा है।

आज भी लोग सार्वजनिक स्वच्छता की सोच विकसित नहीं कर पाए हैं। घर का कूड़ा निकालकर सार्वजनिक स्थलों पर डालने की मानसिकता से मुक्त नहीं हुए हैं। जब तक हम सफाई को अपना मौलिक कर्तव्य नहीं मानते तब तक डेंगू जैसे रोग रहेंगे। जरुरी है कि लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर सफाई मुहिम में भाग लेने के लिये प्रेरित किया जाए।