एक और टीका

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में देश को एक और बड़ा हथियार मिल गया है। केंद्र सरकार ने अहमदाबाद की कंपनी जाइडस कैडिला की तीन खुराक वाले टीके ‘जाइकोव-डी’ की एक करोड़ खुराक खरीदने के आदेश दिए हैं। देश में विकसित यह दुनिया का पहला ऐसा टीका है, जो डीएनए-आधारित एवं सुई-रहित है। जाइडस कैडिला …

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में देश को एक और बड़ा हथियार मिल गया है। केंद्र सरकार ने अहमदाबाद की कंपनी जाइडस कैडिला की तीन खुराक वाले टीके ‘जाइकोव-डी’ की एक करोड़ खुराक खरीदने के आदेश दिए हैं। देश में विकसित यह दुनिया का पहला ऐसा टीका है, जो डीएनए-आधारित एवं सुई-रहित है। जाइडस कैडिला टीके की प्रति माह एक करोड़ खुराक मुहैया कराने की स्थिति में है। इसकी तीन खुराकों को 28 दिनों के अंतराल पर दिया जाना है।

जाइकोव-डी को 20 अगस्त को दवा नियामक से आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली थी । जाइकोव-डी पहला ऐसा टीका है, जिसे भारत के औषधि नियामक ने 12 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के टीकाकरण के लिए मंजूरी दी है। यह टीका राष्ट्रीय कोरोना वायरस रोधी टीकाकरण अभियान में इस महीने शामिल हो जाएगा। शुरुआत में इसे वयस्कों को लगाने में प्राथमिकता दी जाएगी।

पिछले दो वर्ष में पूरी दुनिया में फैली कोरोना महामारी ने वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की है। इससे निपटने के लिए वैक्सीन निर्माण भी एक चुनौती रहा। देश के वैज्ञानिकों ने शोध एवं अनुभव के आधार पर कार्य करके एक वर्ष से भी कम समय में टीके विकसित किए। सरकार ने इस वर्ष के समाप्त होने तक सभी नागरिकों को कोरोना वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वैक्सीन की कमी और टीकै लगवाने में हिचक के कारण टीकाकरण की रफ्तार शुरुआत में काफी धीमी रही।

जनवरी में टीकाकरण अभियान की शुरूआत की गई थी और अब तक 100 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। देश में फिलहाल पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन कोरोना वैक्सीन प्रयोग की जा रही है। ये दोनों इंजेक्शन के ज़रिए दी जाने वाली वैक्सीन है। वैक्सीन को लगाने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। ज्यादातर वैक्सीन इंजेक्शन के जरिए दी जाती हैं, कुछ ओरल दी जाती हैं, जैसे पोलियो और रोटावायरस वैक्सीन। कुछ वैक्सीन नाक के ज़रिए भी दी जाती हैं। देश में नेजल वैक्सीन के निर्माण को लेकर भी कोशिशें जारी हैं। भारत बायोटेक कोरोना की एक नेज़ल वैक्सीन बना रही है।

इंजेक्शन के जरिए वैक्सीन को लगाने के लिए सीरिंज, सुई और प्रशिक्षित स्वाथ्यकर्मियों की ज़रूरत होती है। इसकी पूरी व्यवस्था में बहुत संसाधन लगते हैं और इसके लगवाने में लोगों को हिचक भी होती है। यह वैक्सीन टीके से जुड़ी हिचकिचाहट को कम करेगी और इसके उपलब्ध होने पर देश में टीकाकरण को और गति मिलेगी।