बरेली: नकद पर जोर, कैशलेस ट्रांजेक्शन मजह 30 फीसदी तक
बरेली, अमृत विचार। टैक्स चोरी और कालेधन पर लगाम लगाने को पांच साल पहले 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 8 बजे देश को संबोधित किया था और 500 व 1000 रुपये के नोटों को अवैध घोषित कर दिया था। बताया गया था कि वित्तीय पारदर्शिता और कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने …
बरेली, अमृत विचार। टैक्स चोरी और कालेधन पर लगाम लगाने को पांच साल पहले 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 8 बजे देश को संबोधित किया था और 500 व 1000 रुपये के नोटों को अवैध घोषित कर दिया था। बताया गया था कि वित्तीय पारदर्शिता और कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। जिसके बाद बैंकों के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें आज तक जेहन में जिंदा हैं लेकिन पांच साल पूरे होने के बाद भी कमजोर इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर और जागरूकता की कमी के चलते कैशलेस भुगतान व्यवस्था शत प्रतिशत लागू नहीं हो सकी है। अधिकतर लोग नकद ही लेनदेन करते हैं।
बाजार की बात करें तो एक अनुमान के मुताबिक कारोबार का महज 25 से 30 फीसदी की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होता है। इसको लेकर जब अगल-अलग वर्ग के लोगों से बात की तो सुझाव दिए गए कि अगर कैशलैस इकोनॉमी को लागू करना है तो भ्रष्टाचार को खत्म करते हुए बैकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर गांव से गली मोहल्लों तक उपलब्ध कराना होगा। सर्विस चार्ज के नाम पर बैंकों की सेवाओं को महंगा करने से रोकना होगा। इधर, जानकारों का भी यह कहना है कि नोटबंदी जिस मकसद से की गई थी वह पूरा नहीं हुआ।
कब-कब हुई नोटबंदी
– पहली बार अंग्रेज सरकार ने 1946 में नोटबंदी की थी।
– आजाद भारत में 1978 में भी पहली नोटबंदी की गई थी।
– 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने नोटबंदी की थी।
नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेश अर्थ व्यवस्था पर जोर दिया था, इसका असर भी हुआ। लोगों ने डिजिटल बैंकिंग अपनानी शुरू की, लेकिन कोविड काल में लॉकडाउन के दौरान डिजिटल बैंकिंग को नए आयाम मिले। आज स्थिति यह है कि देश की करीब 65 फीसदी अर्थ व्यवस्था कैशलेश यानी डिजिटल बैंकिंग पर आधारित हो चुकी है। डिजिटल बैंकिंग कैश लेन/देन की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित है।
—एमएम प्रसाद, जिला अग्रणी अधिकारी
