जांच पर सवाल
उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में एक बार फिर उत्तर प्रदेश पुलिस को आड़े हाथों लिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच से असंतुष्ट उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जांच उम्मीद के मुताबिक नहीं की जा रही है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को सुझाव दिया कि 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हुई …
उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में एक बार फिर उत्तर प्रदेश पुलिस को आड़े हाथों लिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच से असंतुष्ट उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जांच उम्मीद के मुताबिक नहीं की जा रही है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को सुझाव दिया कि 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हुई घटना की जांच की निगरानी उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश करें। चार किसानों सहित आठ लोग किसानों के विरोध के दौरान हिंसा में मारे गए थे।
इस मामले में पुलिस अब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने 20 अक्टूबर को भी कहा था कि उसे यह आभास हो रहा है कि यूपी पुलिस जांच में ‘अपने पैर खींच रही है।’ मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी, ‘यह एक कभी न खत्म होने वाली कहानी नहीं बननी चाहिए।’ सुनवाई के पहले दिन, 8 अक्टूबर को, अदालत ने प्रदेश पुलिस की जांच पर अपना असंतोष दर्ज किया था, क्योंकि मुख्य आरोपी आशीष मिश्र को तब तक गिरफ्तार नहीं किया गया था। पीठ ने पूछा कि क्या पुलिस के लिए हत्या के एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय उसे दिए गए समन के जवाब का इंतजार करना सामान्य बात है।
एसआईटी जांच को ‘ढीला ढाला’ बताते हुए कहा था कि लगता है कि मुख्य अभियुक्त को बचाने की कोशिश की जा रही है। खंडपीठ ने पूछा कि मुख्य अभियुक्त के अलावा अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन क्यों जब्त नहीं किए गए। अदालत ने कहा कि लखीमपुर खीरी में दो तरह से हत्याएं हुई हैं। न्यायाधीश कोहली ने विशेष रूप से पूछा कि क्या यह सरकार का रुख है कि अन्य आरोपी सेल फोन का इस्तेमाल नहीं करते थे? ऐसा लग रहा है कि एक विशेष तरीके से गवाहों के बयान दर्ज करके एक विशेष आरोपी को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
सर्वोच्च अदालत की तल्ख टिप्पणियों से साफ है कि मामले की जांच अदालत की अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो रही है। विपक्षी दल भी कह रहे है कि मामले में स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार किसानों को कुचलने वालों के साथ खड़ी है, जबकि न्याय के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। हालांकि घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि सरकार मारे गए लोगों के परिजनों के साथ खड़ी है और उन्हें पूरा न्याय दिलाया जाएगा और जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अदालत का आकलन किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए ठीक नहीं कहा सकता।
