अफगानिस्तान पर वार्ता

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Edited By Amrit Vichar
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अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण से पैदा हुई सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के मद्देनजर मध्य एशियाई देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक बुलाकर भारत ने साबित कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसका रूख सख्त है। अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के कब्जे के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा हो गईं …

अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण से पैदा हुई सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के मद्देनजर मध्य एशियाई देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक बुलाकर भारत ने साबित कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसका रूख सख्त है। अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के कब्जे के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा हो गईं और वह अराजकता का सामना कर रहा है। आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। पड़ोसी देशों की परेशानी भी बढ़ी है। पूरा क्षेत्र आतंकवाद, कट्टरवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के बढ़ते खतरों का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत ने ‘दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता’ बुलाकर सही समय पर बड़ी पहल की है।

बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित वार्ता के प्रतिभागियों ने अफगानिस्तान में उभरती स्थिति, इसके क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की। वार्ता में ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने हिस्सा लिया। दिल्ली वार्ता के बाद की गई घोषणा के अनुसार अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकवादी कृत्य को पनाह देने, प्रशिक्षण देने या वित्त पोषण के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

वार्ता में शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर अफगानिस्तान के लिए मजबूत समर्थन का आह्वान किया गया। दिल्ली वार्ता अफगानिस्तान में खुली सोच वाली और सही मायने में समावेशी सरकार के गठन का आह्वान करती है। इस मौके पर कट्टरता, उग्रवाद, अलगाववाद और मादक पदार्थों की तस्करी के खतरे के खिलाफ सामूहिक सहयोग का आह्वान किया गया। तय किया कि अफगानिस्तान में महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यक समुदायों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न हो। समझा जा सकता है कि इस वार्ता का न केवल अफगानिस्तान के लोगों के लिए बल्कि उसके पड़ोसियों और क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं।

चर्चा के प्रमुख बिन्दुओं से इन देशों के सुरक्षा अधिकारियों ने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अवगत कराया। निमंत्रण के बावजूद चीन व पाकिस्तान ने वार्ता से अलग रहकर भारत विरोध के अपने इरादे जाहिर कर दिए। कहा जा सकता है कि भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता का नेतृत्व कर मध्य एशियाई देशों को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि भारत के सहयोग के बिना आतंकवाद से लड़ना एक कठिन चुनौती है।

वह भी तब जब आतंकवाद को पनाह देने का काम परमाणु शक्ति संपन्न देश चीन और पाकिस्तान कर रहे हैं। इससे साफ है कि सभी देश भारत को एक उभरती हुई वैश्विक ताकत के रूप में देख रहे हैं। वार्ता का आयोजन कर भारत ने उन सभी देशों को अपनी नीतियों पर फिर से विचार करने के लिए बाध्य कर दिया है, जो तालिबान के सहारे अपने हितों को पूरा करना चाहते हैं।