बरेली: कारोबारी टैक्स और पेनाल्टी से बचने को नहीं कर सकेंगे तिकड़म
बरेली, अमृत विचार। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) में टैक्स और पेनाल्टी से बचने के लिए कारोबारी अब अपील में जाने का शुल्क अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) से जमा नहीं कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत उन्हें अब अपने बैंक चालान से यह राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही अपील स्वीकार की जाएगी। इस …
बरेली, अमृत विचार। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) में टैक्स और पेनाल्टी से बचने के लिए कारोबारी अब अपील में जाने का शुल्क अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) से जमा नहीं कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत उन्हें अब अपने बैंक चालान से यह राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही अपील स्वीकार की जाएगी। इस संबंध में जीएसटी विभाग ने दिशा निर्देश देना शुरू कर दिए हैं।
जीएसटी में बहुत से ऐसे कारोबारी हैं जो पेनाल्टी लगाए जाने पर भी उसे चुकाने की जगह टालते या फिर अपनी तिकड़म लगाने में जुटे रहते हैं। इसकी वजह से वसूली नहीं हो पाती। इस स्थिति में कारोबारियों को जीएसटी अधिनियम की धारा 107 के तहत प्रथम अपील सीजीएसटी के मामले में कमिश्नर अपील और एसजीएसटी के मामले में एडीशनल कमिश्नर ग्रेड दो (अपील) के सामने आदेश जारी होने के 90 दिन के अंदर देनी होती है। यह अपील तभी स्वीकार की जाती है, जब लगाए गए कर का 10 फीसदी धन अपील प्रस्तुत करते समय जमा करा दिया जाए।
इसके बाद बाकी कर, ब्याज, अर्थदंड की मांग धारा 107(7) के तहत खुद अपील निस्तारण तक स्थगित हो जाती है। जानकार बताते हैं कि इन मामलों में आइटीसी से अपील की राशि समायोजित नहीं की जा सकती। लेकिन, इसके बाद भी कई कारोबारी इलेक्ट्रानिक कैश बुक में पड़े धन से अपील का धन समायोजित कर देते हैं। अब इस मामले में न्यायालय के निर्देश ने भी साफ कर दिया है कि कारोबारी को अपने बैंक चालान से यह राशि जमा करनी होगी।
इस आदेश के बाद वाणिज्य कर अधिकारियों ने अपील में आ रहे सभी कारोबारियों को अपने बैंक चालान से यह राशि जमा करने के निर्देश देने शुरू कर दिए हैं। डिप्टी कमिश्नर गौरी शंकर के मुताबिक कारोबारी अपनी आइटीसी से अपील के शुल्क को जमा कर रहे थे, जबकि इलेक्ट्रानिक लेजर में पास होकर आई आइटीसी से इस शुल्क को जमा नहीं किया जा सकता। इसलिए अब सभी को अपने बैंक चालान से यह राशि जमा करनी होगी।
