अयोध्या: पंचकोसी परिक्रमा में दिखा श्रद्धालुओं का उत्साह, सुरक्षा के हैं पुख्ता इंतजाम
अयोध्या। रामनगरी में 14 कोसी परिक्रमा के बाद पंचकोसी परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। देवथानी एकादशी पर सुबह 9 बजे से शुरू हुई परिक्रमा में स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं बल्कि खास लोग भी पुण्य के भागी बनने के लिए पहुंचे। सुबह शुभ मुहूर्त में शुरू हुई परिक्रमा में नवयुवक, महिलाएं, बच्चे, …
अयोध्या। रामनगरी में 14 कोसी परिक्रमा के बाद पंचकोसी परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। देवथानी एकादशी पर सुबह 9 बजे से शुरू हुई परिक्रमा में स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं बल्कि खास लोग भी पुण्य के भागी बनने के लिए पहुंचे। सुबह शुभ मुहूर्त में शुरू हुई परिक्रमा में नवयुवक, महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सभी शामिल रहे। रविवार देर शाम तक परिक्रमार्थियों के आने का क्रम जारी रहा। प्रशासन ने लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से पहले ही अयोध्या धाम को सुरक्षा के घेरे में जकड़ लिया था और रूट डायवर्जन लागू कर दिया था।
पंचकोसी परिक्रमा 15 किलोमीटर की परिधि में उदया पब्लिक स्कूल, राजघाट, नया घाट, हनुमान गुफा और कारसेवक पुरम से होते हुए सम्पन्न होती है। इसमें भी श्रद्धालुओं ने अलग-अलग जगहों से परिक्रमा उठाई। इस बार परिक्रमा में 12 से 18 साल तक के किशोरों ने भी रामधुन के साथ परिक्रमा की। अयोध्या मंडल के सभी जनपदों के अलावा गोंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, अम्बेडकरनगर, लखनऊ, सीतापुर, कानुपर, उन्नाव, गोरखपुर, रायबरेली व प्रयागराज से भी श्रद्धालु परिक्रमा करने पहुंचे।
गोसाईगंज निवासी 74 वर्षीय रामरूप ने बताया कि वह पिछले 35 वर्षों से परिक्रमा कर रहे हैं। भगवान राम की महिमा ही है कि आज 74 वर्ष का हो जाने के बावजूद पंचकोसी परिक्रमा करने में कोई दिक्कत नहीं होती है। पहले 14 कोसी परिक्रमा भी करता था। मेले में महिला श्रद्धालुओं की संख्या भी अधिक थी। महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को लेकर परिक्रमा कर रही थीं। रूदौली विधायक रामचंद्र यादव ने भी अपने समर्थकों के साथ परिक्रमा की।
कई श्रद्धालुओं ने परिक्रमा करने के बाद सरयू जी में स्नान किया और हनुमानगढ़ी और राम मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लिया। राजनीतिक, समाजिक व स्वयं सेवी संस्थाओं ने जगह-जगह जलपान व दवाओं के स्टाल लगाए। प्रशासन की तरफ से आश्रय स्थल भी बनाए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था। प्रशासन ने एक दिन पहले ही अयोध्या आने वाले वाहनों के लिए रूट डायवर्जन कर दिया था। परिक्रमा सोमवार की सुबह समाप्त होगी।

डीएम व एसएसपी ने मार्ग का किया निरीक्षण
जिलाधिकारी नितीश कुमार व एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने संयुक्त रूप से अयोध्या में चल रही पंचकोसी परिक्रमा का निरीक्षण किया और मेला ड्यूटी में लगाए गए सभी मजिस्टेट, अधिकारियों, पुलिस के जवानों, चिकित्सकों, स्वयं सेवी संगठनों को पूरी लगन और निष्ठा के साथ परिक्रमा को सफल कराने का निर्देश दिया। दोनों अफसरों ने पंचकोसी मार्ग का निरीक्षण किया और सभी जोनल, सेक्टर, स्टेटिक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे अपने साथ लगे पुलिस अधिकारियों के साथ पंचकोसी परिक्रमा मार्ग का सूक्ष्मता के साथ भ्रमण करते रहें। किसी भी स्थल पर कोई भी परेशानी हो तो उसे अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में स्थापित कंट्रोल रूम में सूचना दें।
मंदिरों में हुआ तुलसी विवाह
वैष्णव संप्रदाय में अयोध्या के सभी मंदिरों में भगवान शालिग्राम और तुलसी जी का विवाह संस्कार किया गया। लोगों ने अपने घरों में तुलसी जी के पौधे की पूजा की। कार्तिक मास की नवमी, दशमी और एकादशी को व्रत और पूजन कर तुलसी विवाह किया जाता है। इसके अगले दिन तुलसी का पौधा किसी ब्राह्मण को दान करना शुभ माना जाता है।
पंचकोसी परिक्रमा करने पर भौतिक शरीर से मिलता है छुटकारा
राम नगरी में पंचकोसी परिक्रमा की परंपरा सदियों पुरानी है। यह राममंदिर के पांच कोस के भीतर की जाती है। इस दिन को देवउठनी, देवउठानी, देवोत्थान एकादशी और हरि प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। देवोत्थान एकादशी के दिन से ही विवाह संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।
मान्यता है कि मानव शरीर पांच भौतिक तत्वों से मिलकर बना है, पृथ्वी,जल, वायु, अग्नि और आकाश। मनुष्य को इस भौतिक शरीर में जन्म लेने से लेकर मरने तक कई कष्टों का सामना करना पड़ता है। जो लोग अयोध्या की 5 कोसी परिक्रमा कर लेते हैं, उनको भौतिक शरीर से छुटकारा मिल जाता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
