जरूरी सबक

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Edited By Amrit Vichar
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देश में जैसे-जैसे टीकाकरण का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से घट रही है। लेकिन महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। महामारी की रफ्तार भले ही धीमी हो, परंतु मौतों का आंकड़ा खतरे की ओर इशारा कर रहा है। पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 11,271 नए मामले …

देश में जैसे-जैसे टीकाकरण का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से घट रही है। लेकिन महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। महामारी की रफ्तार भले ही धीमी हो, परंतु मौतों का आंकड़ा खतरे की ओर इशारा कर रहा है। पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 11,271 नए मामले सामने आने के बाद रविवार को संक्रमितों की कुल संख्या 3.44 लाख हो गई।

इस अवधि में 285 मरीजों की मौत होने से महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4,63,530 हो गई है। जबकि राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत कुल 112 करोड़ खुराक दी जा चुकी है। उधर यूरोप के सर्वाधिक टीकाकरण वाले देशों में कोरोना का बढ़ रहा है। रुस और चीन में भी कोरोना का कहर जारी है। चीन के 21 प्रांतों में महामारी ने पांव पसार लिए हैं। नीदरलैंड में संक्रमण के मामले बढ़ने पर लाकडाउन लगा दिया गया है।

ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 240 में से 55 देशों में संक्रमण की दर घटने के बजाय बढ़ रही है। यूरोप खासतौर पर जोखिम में है और विश्व स्वास्थ्य संगठन उसे महामारी का ‘केंद्र’ कह रहा है और उसने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में महामारी के कारण पांच लाख और लोग जान गंवा सकते हैं। यूरोप सबसे संवदेनशील दौर से गुजर रहा है। यूरोप में जो हो रहा है, वह दुनिया के लिए चेतावनी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी निदेशक माइकल रयान का कहना है कि हर देश को अब अपने महामारी विज्ञान को देखने-समझने की जरुरत है।

यूरोप में लगातार बढ़ते मामलों में भारत के लिए सबक छिपा हुआ है। भारत भी अगर मामलों में पहले जैसी बढ़ोतरी और लाकडाउन से बचना चाहता है तो उसे भी पूरे घटनाक्रम पर करीबी निगाह रखनी होगी। कोरोना के प्रसार की गति भारत में धीमी है, इसके लिए जानकार कह रहे हैं कि दूसरी लहर में देश की बड़ी आबादी करोना वायरस के संपर्क आई थी। इस कारण उनके शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो चुका है। दूसरी लहर के दौरान भारत में भारी तबाही मची थी।

उस दौरान देश के हालात काफी कुछ वैसे ही थे जैसे कि पिछले डेढ़ साल में यूरोप में देखने को मिले। सबसे पहला और अहम सबक तो यही है कि टीकाकरण कार्यक्रम में तेजी लाई जाए और उसे पूरा किया जाए। देश में टीकाकरण कार्यक्रम को तेज करने के लिए यह जरूरी है कि जिन लोगों ने टीके की पहली खुराक ले ली है उन्हें समय पर दूसरी खुराक लगा दी जाए। लोग संवेदनशील स्थानों पर कोविड प्रोटोकाल का पालन करें।