जौनपुर में बिरसा मुंडा की 146वीं जयंती मनायी गई…
जौनपुर। जिले के सरावां गांव में स्थित शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर सोमवार को हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी व लक्ष्मी बाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने आदिवासी नेता और महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 146 जयंती मनायी। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शहीद पर मोमबत्ती व अगरबत्ती जलाया। साथ ही दो मिनट का मौन …
जौनपुर। जिले के सरावां गांव में स्थित शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर सोमवार को हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी व लक्ष्मी बाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने आदिवासी नेता और महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 146 जयंती मनायी।
इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शहीद पर मोमबत्ती व अगरबत्ती जलाया। साथ ही दो मिनट का मौन रखकर महान क्रांतिकारी मुंडा को श्रद्धांजलि दी। क्रांति स्तंभ पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए लक्ष्मीबाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि आदिवासी नेता बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को लिहतु रांची ( तत्कालीन बिहार प्रांत, अब झारखंड) में हुआ था।
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बिरसा मुंडा के मन में विद्यार्थी जीवन से ही ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आक्रोश पैदा हो गया। मात्र 19 साल की अवस्था में श्री मुंडा ने बिहार से अंग्रेजों को जाने के लिए संघर्ष शुरू किया था। मुंडा ने उस समय आदिवासी समाज को शिक्षित का काम किया। इसके लिए वे अंग्रेजों से लड़ाई लड़ते थे।
इससे नाराज होकर अंग्रेजों ने मात्र 25 साल की अवस्था में नौ जून सन् 1900 में मुंडा को फांसी पर लटका दिया। आज भी झारखंड व बिहार के आदिवासी लोग श्री मुंडा को अपना भगवान मानते हैं। मंजीत कौर ने आदिवासी समाज के नायक और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ”जनजातीय गौरव दिवस“ घोषित करने के केन्द्रीय मंत्रिमंडल के फैसले पर आभार जताया है।
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