प्रदूषण की चिंता

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Edited By Amrit Vichar
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वायु प्रदूषण के बढ़े स्तर पर उच्चतम न्यायालय लगातार चिंता जता रहा है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने प्रदूषण से निपटने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को एक आपात बैठक बुलाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि हरियाणा एवं पंजाब के किसानों द्वारा पराली जलाने का मुद्दा उठाकर बार-बार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु …

वायु प्रदूषण के बढ़े स्तर पर उच्चतम न्यायालय लगातार चिंता जता रहा है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने प्रदूषण से निपटने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को एक आपात बैठक बुलाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि हरियाणा एवं पंजाब के किसानों द्वारा पराली जलाने का मुद्दा उठाकर बार-बार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की खतरनाक स्थिति तक बढ़ने का शोर मचाया जाता है लेकिन सरकार की रिपोर्ट से अब यह साफ हो गया है कि प्रदूषण की बड़ी वजह पराली जलाना नहीं, बल्कि सड़कों पर दौड़ने वाले लाखों वाहन, दिल्ली और आसपास के शहरों में बड़े पैमाने पर हो रहे भवन एवं अन्य निर्माण कार्यों की वजह से निकलने वाले धूल और बिजली उत्पादन करने वाले संयंत्र हैं, जो 74 फीसदी प्रदूषण फैलाते हैं।

पराली जलाने से सिर्फ 10 प्रतिशत प्रदूषण की बात रिपोर्ट में कही गई है। शीर्ष अदालत ने शनिवार को भी कहा था कि वायु प्रदूषण के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहराना एक फैशन बन गया है। अदालत ने निर्देश दिए कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब सरकार के मुख्य सचिवों की वायु प्रदूषण कम करने के मुद्दे पर तत्काल बैठक बुलाई जाए और एहतियाती उपायों को लागू करने की व्यवस्था की जाए।

अक्टूबर-नवंबर में हर वर्ष दिल्ली व आसपास की हवा इतनी खराब हो जाती है कि दम घुटता-सा लगने लगता है। मुद्दा तात्कालिक तौर पर चर्चा में आता है, लेकिन जैसे ही यह वक्त बीतता है, उपाय एजेंडे से गायब हो जाते हैं। दरअसल प्रदूषण उत्पन्न करने वाले असल स्रोतों पर कोई आंच नहीं आए इसीलिए कभी पराली जलाने को वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाता हैं और कभी कोई और तर्क दे दिए जाते हैं। स्विट्जरलैंड स्थित क्लाइमेट ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार खराब वायु गुणवत्ता वाले दुनिया के दस शहरों की सूची में दिल्ली के साथ ही कोलकाता और मुंबई भी शामिल हैं।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 180 देशों की वायु गुणवत्ता में भारत बहुत पीछे 168 वें स्थान पर है। उत्तर भारत के छोटे-छोटे शहरों का भी हाल बुरा है। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह देश के 15 सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा वाले शहरों में दस उत्तर प्रदेश के पाए गए। इनमें फिरोजाबाद, और आगरा भी थे, जहां वायु गुणवत्ता 489 और 472 पाया गया। साफ है कि इस समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर और दीर्घकालिक नजरिए से ठोस उपाय अपनाते हुए ही हल किया जा सकता है। साथ ही जरूरी है कि सरकारों से लेकर आम आदमी तक प्रकृति के महत्व को समझें और उसी के हिसाब से अपनी दिनचर्या बनाएं, तभी स्वच्छ हवा मिल सकेगी।