नई चाल
विस्तारवादी नीतियों के चलते चीन लगातार भारत के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। पिछले एक वर्ष में चीन ने भूटान में कई गांव बसा लिए हैं। चीन का यह कदम भारत के लिए चिंताजनक है। इससे पहले 3 नवंबर को अमेरिका की रक्षा विभाग की रिपोर्ट में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अरुणाचल …
विस्तारवादी नीतियों के चलते चीन लगातार भारत के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। पिछले एक वर्ष में चीन ने भूटान में कई गांव बसा लिए हैं। चीन का यह कदम भारत के लिए चिंताजनक है। इससे पहले 3 नवंबर को अमेरिका की रक्षा विभाग की रिपोर्ट में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अरुणाचल सेक्टर से सटे विवादित क्षेत्र में चीन द्वारा गांव बसाए जाने का खुलासा किया गया था। साथ ही मंगलवार को रिपब्लिकन पार्टी के शीर्ष सांसद जान कार्निन ने अमेरिकी संसद में कहा कि चीन, भारत के साथ ‘सीमा युद्ध’ कर रहा है।
दरअसल भूटान की सीमा सुरक्षा के लिए भारत वहां सीमित सशस्त्र बल रखता है। ऐसे में इसका असर अधिक रूप से भू-रणनीतिक प्रभाव पर भी होगा। वहीं पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश में उसकी बढ़ती सक्रियता भी भारत की चिंता बढ़ा रही है। अक्टूबर में चीन ने नया भूमि सीमा कानून बनाया था। यह कानून पहली जनवरी से प्रभावी होगा। सामरिक विशेषज्ञ इसका असर भारत-चीन सीमा विवाद पर पड़ने का अंदेशा जता रहे हैं।
चीन ने चौतरफा दबाव बढ़ाने की रणनीति के तहत भूटान के साथ आपसी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि गांव बसाना क्यान चीन और भूटान के बीच नए समझौते का हिस्सा है या चीन ने भूटान की जमीन पर कब्जा किया है? अगर चीनी सैन्य विकास पर एक वैश्विक शोधकर्ता का यह दावा सच है तो भारत के लिए चिंता की बात है। क्योंकि ऐतिहासिक रूप से भूटान भारत का करीबी रहा है और उसकी विदेश नीति पर भारत का काफी प्रभाव रहा है।
जानकारों का कहना है कि चीनी गांवों की संख्या चार से ज्यादा है। यही नहीं चीन ने यहां पर बड़े पैमाने पर सैनिकों को भी तैनात किया है। चीन के गांव बनाने से कई तरह के सवाल सामरिक हलके में उठ रहे हैं। चीन लगातार भूटान पर दबाव डाल रहा है कि वह जमीनी सीमा पर फिर से चर्चा करे।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 3,488 किलोमीटर लंबे इलाके में है जबकि भूटान के साथ चीन का विवाद 400 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर है। अच्छी बात है कि सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के मामले में भारत ने तेजी दिखाई है। चीन की विस्तारवाद की नीति का मुकाबला करना जरूरी है और भारत को अपने पड़ोसी देश के साथ एलएसी पर लगातार कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।
