विकास के मॉडल के दम पर उत्तराखंड में भी बनाएंगे सरकार : राजेन्द्र चौधरी

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लखनऊ। कांग्रेस और भाजपा सरकारों पर उत्तराखंड के विकास की उपेक्षा का आरोप लगाते हुये सपा के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र चौधरी ने दावा किया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी (सपा) पर्वतीय राज्य में सरकार बनाकर विकास और पर्यटन की तमाम संभावनाओं को अमली जामा पहनायेगी। चौधरी ने सोमवार को …

लखनऊ। कांग्रेस और भाजपा सरकारों पर उत्तराखंड के विकास की उपेक्षा का आरोप लगाते हुये सपा के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र चौधरी ने दावा किया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी (सपा) पर्वतीय राज्य में सरकार बनाकर विकास और पर्यटन की तमाम संभावनाओं को अमली जामा पहनायेगी।

चौधरी ने सोमवार को विशेष साक्षात्कार में कहा कि उनकी पार्टी उत्तराखंड में राष्ट्रीय लोकदल और उत्तराखंड क्रांति दल के साथ मिल कर सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा “ हम 2017 के विकास मॉडल को आधार बनाकर जनता के बीच जाएंगे और विचार एवं विकास का विकल्प पर्वतीय राज्य की जनता को देंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एस एन सचान के नेतृत्व में पूरी संजीदगी से संगठन की मजबूती के काम में लगी हुयी है।

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कांग्रेस और भाजपा की अब तक सरकारों से उकतायी जनता उनकी पार्टी के विकास के माडल को पूरी गंभीरता से लेगी। जिसके चलते सपा उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड में अपनी सरकार बनाने में सफल होगी। सपा नेता ने कहा कि उन्होंने हाल ही में पर्वतीय राज्य का पांच दिवसीय दौरा किया था। जिसमें वह हल्द्वानी, रूद्रपुर और काठगोदाम जाकर लोगों से मिले। वहां की जनता मौजूदा सरकार से बहुत दुखी है और सपा की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। उन्होंने कहा “ उत्तराखंड में विकास की प्रचुर संभावनायें हैं, मगर पृथक राज्य का दर्जा मिलने के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने राज्य की खुशहाली और आर्थिक तरक्की की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजन प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण होने के बावजूद राज्य की आर्थिक बदहाली की ओर अग्रसर होता गया।

सपा प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश से अलग होने के 21 साल बाद भी पर्वतीय राज्य में मूलभूत संसाधनों का सर्वथा अभाव है। स्वास्थ्य संसाधनों के अभाव में कोविड काल में सैकड़ों लोग असमय मौत का शिकार हुये। सड़कों के अभाव में लोगों को आज भी ऊबड़ खाबड़ रास्ते में मीलों चलना पड़ता है। इसके साथ ही सैकड़ों गांव बिजली की रोशनी के मोहताज हैं। रोजगार न होने से युवा अन्य प्रदेशों में पलायन को मजबूर हैं। उत्तराखंड में अब तक कांग्रेस और भाजपा की सरकारें रहीं हैं। जिनके उदासीन रवैये और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन देने के चलते राज्य की तरक्की और खुशहाली की बजाय बदहाली की गर्त में समाता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, कुटीर उद्योग और बिजली उत्पादन की बदौलत पर्वतीय प्रदेश आर्थिक मोर्चे पर न सिर्फ सशक्त हो सकता है। बल्कि पलायन की रफ्तार पर भी विराम लगाया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में बागवानी क्षेत्र मे प्रोत्साहन और फलों के निर्यात की कार्ययोजना पर काम किया जा सकता है।

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