शाहजहांपुर: सांसद खेल स्पर्धा के पुरस्कार वितरण में खिलाड़ियों का जमकर हंगामा
शाहजहांपुर, अमृत विचार। सांसद खेल स्पर्धा के अंतिम दिन पुरस्कारों को लेकर खिलाड़ियों ने जमकर हंगामा किया। गुस्साए खिलाड़ियों ने पुरस्कार वितरण में भेदभाव का आरोप लगाते हुए स्टेडियम का मुख्य द्वार बंद कर दिया और सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। देखते ही देखते आयोजन स्थल पर हालात इतने खराब हो गए कि पुलिस …
शाहजहांपुर, अमृत विचार। सांसद खेल स्पर्धा के अंतिम दिन पुरस्कारों को लेकर खिलाड़ियों ने जमकर हंगामा किया। गुस्साए खिलाड़ियों ने पुरस्कार वितरण में भेदभाव का आरोप लगाते हुए स्टेडियम का मुख्य द्वार बंद कर दिया और सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। देखते ही देखते आयोजन स्थल पर हालात इतने खराब हो गए कि पुलिस भी मूक दर्शक बनी रह गई। हंगामा करने वालों में लड़कों के साथ लड़कियां भी थीं, जिन पर हाथ डालने का साहस स्टेडियम के अंदर मौजूद पुलिस नहीं जुटा पा रही थी।
बाद में लोहे के बेल्चा (मोटी रॉड) गेट में फंसाकर तार तोड़ा जा सका। तब गेट खुल सका। गेट खुलने पर पुलिस ने खिलाड़ियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। आरोप है कि कुछ खिलाड़ियों के साथ पुलिस ने अभद्रता करते हुए उनकी पिटाई भी की। इसी बीच सांसद समेत अन्य अतिथियों की गाड़ियां पुलिस ने बाहर निकलवाईं। तब जाकर मामला शांत हुआ।
बता दें कि जनपद में 21 नवंबर से पांच दिवसीय सांसद खेल स्पर्धा का आयोजन किया जा रहा था। ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिताओं के बाद 25 नवंबर को परमवीर चक्र नायक जदुनाथ सिंह स्टेडियम में जनपद के सभी ब्लॉकों के विजेताओं को पुरस्कार के लिए बुलाया गया था। खिलाड़ियों का कहना था कि उन्हें बताया गया था कि विजयी खिलाड़ियों को स्टेडियम में आकर्षक पुरस्कार के साथ नगद पुरस्कार भी दिया जाएगा। पुरस्कार पाने के लिए सुबह से स्टेडियम में ब्लाकों के विजेता खिलाड़ी जुटना शुरू हो गए थे।
इधर, प्रतियोगिताओं के कुछ फाइनल मुकाबले भी कराए जा रहे थे, जिसमें देर भी हुई। दोपहर बाद सांसद अरुण सागर दलबल के साथ पुरस्कार बांटने के लिए स्टेडियम पहुंच गए। बताया जाता है कि काफी विचार-विमर्श के बाद तय हुआ कि क्रिकेट और वॉलीबाल में प्रथम और द्वितीय स्थान पाने वाली टीमों को ट्रॉफी के साथ क्रमश: 10000, 5100 और 2100 रुपये नगद इनाम भी दिया जाए। इसी के अनुरूप पुरस्कार वितरण शुरू कर दिया गया।
आयोजकों के इस निर्णय का अन्य एथलेटिक्स, कुश्ती, कबड्डी, भारोत्तलन आदि के विजेताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि अन्य खेलों के विजेताओं को भी कुछ न कुछ नगद पुरस्कार दिया जाना चाहिए। किसी विजेता टीम को हजारों रुपये और ट्रॉफी शेष को सिर्फ प्रमाण पत्र देना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। यह खेल और खिलाड़ियों के साथ भेदभाव है, जो स्वीकार नहीं किया जाएगा। काफी समझाने के बाद भी खिलाड़ी नहीं माने और फिर उन्होंने हंगामा काटना शुरू कर दिया।
पहले तो उनके हंगामे को हल्के में लिया गया, लेकिन मैदान के बाहर जब खिलाड़ियों ने नारेबाजी करते हुए स्टेडियम का मुख्य द्वार जब बंद कर दिया, तब पुलिस के कान में जूं रेंगी और आनन-फानन में खिलाड़ियों को हटाकर गेट खुलवाने की कवायद शुरू कर दी गई। खिलाड़ियों के आक्रोश और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए तत्काल और पुलिस बुला ली गई।
अब समस्या ये खड़ी हुई कि तत्काल बुलाई गई पुलिस स्टेडियम के अंदर कैसे पहुंचे। तब गेट तोड़ने और खिलाड़ियों द्वारा गेट पर डाले गए लोहे के तार को काटने का प्रयास किया जाने लगा। जैसे-तैसे लोहे की रॉड (बेल्चा) से तार तोड़कर गेट खोला जा सका। गेट खुलते ही पुलिस ने खिलाड़ियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। इस पर कुछ लड़कियां जमीन पर बैठकर नारेबाजी करने लगीं। खिलाड़ियों का आरोप था कि सरकार से खेलों के लिए करोड़ों रुपये आए, लेकिन खिलाड़ियों के साथ भेदभाव किया रहा है। उनका कहना था कि या तो सभी को नगद इनाम मिलता, या फिर किसी को नहीं दिया जाना चाहिए था।
खिलाड़ियों को भड़काया गया: सांसद
भाजपा सांसद अरुण कुमार सागर का कहना है कि सांसद खेल स्पर्धा का आयोजन भव्य रूप से किया गया। पुरस्कार वितरण के दौरान कुछ खिलाड़ियों को भड़का दिया गया। ये हंगामा उन खिलाड़ियों ने कराया, जो या तो पराजित हो चुके थे या फिर आयोजन का हिस्सा भी नहीं थे। खेल आयोजन खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए किया गया था। जो भी नगद पुरस्कार दिया गया है, वह खेल अधिकारियों और कोच-रेफरी से विचार-विमर्श कर दिया गया। ये राशि मैंने अपने पास से ही दी है।
बच्चों के लिए खाना, पानी, फलों की भी व्यवस्था की। कहीं से कुछ भी बजट नहीं था। कुछ युवाओं ने अफवाह फैला दी कि दो करोड़ रुपया खेलों के लिए आया है। यह बात बिल्कुल भ्रामक है, इसकी जांच कराई जा सकती है। बच्चों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। सभी खिलाड़ी हमारे बच्चों की तरह ही हैं। उन्हें धैर्य से पुरस्कार लेना चाहिए था। प्रमाण पत्रों के साथ उनके स्थान के हिसाब से मेडलों की व्यवस्था भी की गई थी।
