हल्द्वानी: समाजसेवी मिश्र परिवार को एम्स दिल्ली से मिले छह अंगदान डोनर कार्ड, जानें अंगदान की पूरी प्रक्रिया

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हल्द्वानी, अमृत विचार। समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रणी हल्द्वानी के मिश्र परिवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली से जांच के बाद अंगदान डोनर कार्ड प्राप्त हो गए हैं। शुक्रवार को डाक विभाग के वरिष्ठ डाकिया राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कुन्तीपुरम, हिम्मतपुर तल्ला निवासी पं. श्रीनिवास मिश्र के परिवार को डोनर कार्ड उपलब्ध कराए। …

हल्द्वानी, अमृत विचार। समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रणी हल्द्वानी के मिश्र परिवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली से जांच के बाद अंगदान डोनर कार्ड प्राप्त हो गए हैं। शुक्रवार को डाक विभाग के वरिष्ठ डाकिया राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कुन्तीपुरम, हिम्मतपुर तल्ला निवासी पं. श्रीनिवास मिश्र के परिवार को डोनर कार्ड उपलब्ध कराए। एम्स के अस्पताल प्रबंधन की प्रोफेसर डॉ. आरती विज द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में आग्रह किया गया है कि अंगदान डोनर कार्ड को अंगदाता हर समय अपने साथ रखें।

अंगदान के लिए शपथ पत्र के साथ समाजसेवी मिश्र परिवार के सदस्य।

बताते चलें कि पं. श्रीनिवास मिश्र ने सपरिवार नवरात्र पर 10 अक्टूबर को एम्स दिल्ली को अंगदान हेतु शपथ पत्र भेजा था।  डोनर कार्ड प्राप्त करने वालों में श्रीनिवास मिश्र, उनकी पत्नी कमला मिश्र, उनके पुत्र व पुत्रवधू डॉ. सन्तोष मिश्र, गीता मिश्र तथा उनकी पौत्री शिवानी मिश्र व हिमानी मिश्र शामिल हैं।

 

डॉ. संतोष मिश्र ने बताया कि इच्छुक अंगदाता एम्स की वेबसाइट पर जाकर https://www.aiims.edu/aiims/orbo/form.htm लिंक के द्वारा अंगदान की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। एम्स की वेबसाइट में दी गयी जानकारी के अनुसार एम्स में दो तरीके से अंगदान किया जा सकता है।

1. जीवित रहते अंगदान की शपथ लेकर।
2. मृत्यु के उपरांत परिवार के सदस्यों की सहमति से।

यह भी जानें:
– जीवन में कभी भी कोई भी व्यक्ति दो गवाहों की उपस्थिति में जिसमें से एक करीबी रिश्तेदार हो, अंगदान शपथ पत्र भर सकता है।
– अंगदान का शपथ पत्र एम्स की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है, यह प्रपत्र निशुल्क है।
– अंगदान शपथ पत्र के सही पाए जाने पर एम्स दिल्ली द्वारा ऑर्गन डोनर कार्ड प्रदान किया जाता है, एम्स की सलाह होती है कि डोनर कार्ड हर समय जेब में रखना चाहिए।
– अंगदान के समय अंग दानी के परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है।
– अंगदान करने से मृत शरीर को बाहर से कोई क्षति नहीं दिखती है, बल्कि सामान्य दिखती है ताकि अंतिम संस्कार कोई असुविधा ना हो।

डॉ. मिश्र ने बताया कि वेबसाइट में दी गई जानकारी के अनुसार, अंग पुनः स्थापन बैंकिंग संस्था (ORBO)अंगदान की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए देश के विभिन्न भागों में अस्पतालों की चेन बना रहा है ताकि हर जगह से समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके। दिल्ली के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों के साथ-साथ कैलाश हॉस्पिटल नोएडा, संजय गांधी पीजीआई लखनऊ, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, केयर हॉस्पिटल हैदराबाद, जसलोक हॉस्पिटल मुंबई को भी इस अंगदान नेटवर्क से जोड़ा गया है। इसके सुविधाजनक संचालन के लिए हर संस्था में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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