सीतापुर: समय से स्कूल पहुंचने में शिक्षक फेल… छात्र पास

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

सीतापुर। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थित का जायजा लेना हो तो गांजरी क्षेत्र के कुछ स्कूल में जाकर देखा जा सकता है। समय से न स्कूल खुलते हैं और न ही शिक्षक वक्त पर पहुंचते हैं। बच्चों को स्कूल परिसर पहुंच कर टीचरों का इंतजार करना होता है। स्कूल पहुंचने में गुरू फेल और …

सीतापुर। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थित का जायजा लेना हो तो गांजरी क्षेत्र के कुछ स्कूल में जाकर देखा जा सकता है। समय से न स्कूल खुलते हैं और न ही शिक्षक वक्त पर पहुंचते हैं। बच्चों को स्कूल परिसर पहुंच कर टीचरों का इंतजार करना होता है। स्कूल पहुंचने में गुरू फेल और शिष्य पास नजर आते हैं। स्कूलों में न सिर्फ शिक्षा की व्यवस्था गड़बड़ है, बल्कि सफाई व्यवस्था भी चौपट है। स्कूलों में गंदगी के अलावा उनकी हालत भी जर्जर है।

शनिवार की सुबह करीब 09:40 बजे रेउसा विकास क्षेत्र के पुरैनी गांव स्थित सरकारी स्कूल का हाल देखा गया तो यहां की स्थित दयनीय थी। स्कूल के कमरो में ताला लटक रहा था। स्कूल के बच्चे मास्टर साहब के इंतजार में भटक रहे थे। कुछ बच्चे खेलते हुए समय बिता रहे थे तो कुछ बच्चे स्कूल में बस्ता लिए टहल रहे थे। स्कूल खुलने का वक्त नौ बजे तय है, लेकिन यहां तैनात शिक्षकों की मनमानी देखने को मिली। ऐसे में इस स्कूल में बच्चों के शिक्षण कार्य का क्या स्तर होगा, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां तैनात शिक्षक विनय लखनऊ से काफी लंबा सफर तय कर प्राइवेट वाहन से करीब पौने दस बजे स्कूल पहुंचे।

उन्होंने पहुंच कर स्कूल का ताला खोला। अन्य शिक्षक व शिक्षामित्रों की भी मनमानी का पता चल गया। यहां के शिक्षक संजय, शिक्षा मित्र गीता देवी व ओम कुमार गौतम साढ़े दस बजे तक विद्यालय नही पहुंचे थे। जब इस बारे में ग्राम पंचायत पुरैनी बोहरा प्रधान अवधराम पाल से बात की गयी तो उन्होंने बताया की प्रधानाचार्य शकील के पिता का स्वास्थ ठीक न होने के कारण वह लखनऊ गए हुए है। इस बारे में बीईओ रेउसा सुंदर लाल रावत ने बताया कि यदि ऐसा कुछ है तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच कर कार्रवाई भी होगी।

सफाई व्यवस्था भी चौपट

इस स्कूल में सिर्फ शिक्षक ही मनमानी नहीं करते, बल्कि यहां तैनात सफाई कर्मी भी अपने जिम्मेदारी नहीं निभाता। पड़ताल में पता चला कि स्कूल में कूड़ा-करकट जमा है। सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। दरअसल सूत्रों से यह पता चला कि यहां तैनात सफाईकर्मी बिजहेड़ा गांव का है। उसने पुरैनी गांव के एक व्यक्त को सफाई का ठेका दे रखा है।

करीब तीन हजार रुपए प्रति माह पर उसने सफाई करने का ठेका ले रखा है। खास बात यह है कि सफाई का ठेका लेने वाला शख्स भी स्कूल की सफाई करने नियमित तौर पर नहीं पहुंचता है। जिससे विद्यालय के अंदर कूड़ा लगा रहता है। जानकार बताते हैं कि सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने से बच्चे स्वयं टांट से सफाई करते हैं।

यह भी पढ़ें:-अयोध्या: थाना समाधान दिवस पर जिलाधिकारी ने सुनी जनसमस्याएं, अधिकारियों को दी हिदायत

संबंधित समाचार