हल्द्वानी: उत्तराखंड काव्य महोत्सव का आयोजन, देशभर से जुटे साहित्यकार और कवि
हल्द्वानी, अमृत विचार। विश्व हिंदी रचनाकार मंच की ओर से नवाबी रोड स्थित अरुणोदय धर्मशाला में नीरज स्मृति उत्तराखंड काव्य महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें उत्तराखंड के नामचीन कवियों के साथ दिल्ली, कानपुर, बिहार, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ से आए साहित्यकारों ने भी शिरकत की। वरिष्ठ कवियित्री पुष्पलता जोशी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। बिहार …
हल्द्वानी, अमृत विचार। विश्व हिंदी रचनाकार मंच की ओर से नवाबी रोड स्थित अरुणोदय धर्मशाला में नीरज स्मृति उत्तराखंड काव्य महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें उत्तराखंड के नामचीन कवियों के साथ दिल्ली, कानपुर, बिहार, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ से आए साहित्यकारों ने भी शिरकत की।

वरिष्ठ कवियित्री पुष्पलता जोशी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। बिहार से आए युवा ओज कवि ऋषभ देव ने ‘शांत पावन जहां का हर एक खंड है, भूमि पर स्वयं स्वर्ग उत्तराखंड है’… सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। चमोली से आए वरिष्ठ कवि भगत सिंह राणा ने ‘पास होकर कभी दूर जाती रही, जिंदगी हर घड़ी रूलाती रही’, दिल्ली से आई वरिष्ठ कवियित्री रंजना मजूमदार ने ‘जिंदगी कभी गर्म चाय का कप, कभी उड़ती भाप है जिंदगी’… सुनाकर श्रोताओं को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम में साहित्यकारों को महादेवी वर्मा नारी रत्न सम्मान, उत्तराखंड महिला रत्न सम्मान और नीरज काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राधा वाल्मीकि, डॉ. शशि जोशी, शिव कुमार चंदन, आशा शुक्ला, रोहित केसरवानी, दीपा पांडे, हरीश पांडे आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मंजुलता ‘मन’ और मंजुला पांडे ‘मंजुल’ ने किया।

साहित्यकारों की बात
महोत्सव का उद्देश्य हिंदी भाषा और हिंदी के रचनाकारों को प्रोत्साहित करना है। महोत्सव में कवियित्री महादेवी वर्मा की स्मृति में महिला काव्य रत्न और उत्तराखंड कवियित्री विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया। – राघवेंद्र ठाकुर, संस्थापक/अध्यक्ष, विश्व हिंदी रचनाकार मंच
वसुधैव कुटुंबकम के भाव को लेकर महोत्सव का आयोजन किया गया है। देशभर से पहुंचे साहित्यकारों और कवियों की रचनाओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। – पुष्पलता जोशी ‘पुष्पांजलि’, अध्यक्ष, विश्व हिंदी रचनाकार मंच, हल्द्वानी इकाई

इस तरह के आयोजनों से हिंदी के प्रचार प्रसार के साथ साहित्य प्रतिभाओं को भी बढ़ावा मिलता है। समारोह में आकर गौरव की अनुभूति हो रही है। – भगत सिंह राणा ‘हिमाद’, वरिष्ठ साहित्यकार, चमोली
विश्व हिंदी रचनाकार मंच ने देशभर के साहित्यकारों को एकजुट करने का काम किया है। वाकई इस तरह के आयोजन युवा पीढ़ी के भीतर हिंदी को लेकर जिज्ञासा भी जगाते हैं। – ऋषभ देव, युवा ओज कवि, बिहार
हिंदी महोत्सव का हिस्सा बनकर अच्छा लगा। देवभूमि में काव्य की रसधार इसी तरह बहती रहे, यही कामना है। विश्व हिंदी रचनाकार मंच के आभारी हैं। – रंजना मजूमदार, वरिष्ठ साहित्यकार, दिल्ली
