हल्द्वानी: धर्म के लिए हर दिन एक घंटा निकालें और एक रुपया जमा करें : शंकराचार्य
हल्द्वानी, अमृत विचार। गोवर्धन पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज रविवार को चारधाम मंदिर समिति फतेहपुर द्वारा आयोजित धर्मसभा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए प्रत्येक परिवार प्रतिदिन एक घंटा निकाले और एक रुपया जमा करे, तब ही हिंदू मठों, धार्मिक स्थलों का बचाव हो सकेगा। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा …
हल्द्वानी, अमृत विचार। गोवर्धन पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज रविवार को चारधाम मंदिर समिति फतेहपुर द्वारा आयोजित धर्मसभा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए प्रत्येक परिवार प्रतिदिन एक घंटा निकाले और एक रुपया जमा करे, तब ही हिंदू मठों, धार्मिक स्थलों का बचाव हो सकेगा।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि नेता जिस विकास को परिभाषित करते हैं वह विकास नहीं है बल्कि विनाश का कारण है।
इसका उदाहरण हम सबको कोरोना महामारी में देखने को मिला। विदेशी लोग यहां आकर कोरोना महामारी फैलाकर चले गए। इसलिए हमको विदेशी ताकतों को रोकना होगा नहीं तो आने वाले दिनों और भी बड़ी महामारियां देश में आएंगी। आज लोग शहरों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। एक बार भुवनेश्वर में हवाई अड्डा बनने की बात चल रही थी, हमने उस समय कहा था कि यहां पर हवाई अड्डा बनने से भोगभूमि हो जाएगी। लोगों को लगा कि शंकराचार्य विकास में बाधा डाल रहे हैं, लेकिन हमारी बात सत्य साबित हुई।

शंकराचार्य ने कहा कि हम लोगों का जीवन राष्ट्र उत्कर्ष के लिए समर्पित है। राष्ट्र की बेहतरी के लिए आपस में बैठकर विकास की अच्छी तरह समीक्षा हो। उसका स्वरूप निर्धारित हो। भारत, भारत के रूप में उद्भाषित हो। दाल में नमक के समान विकास को क्रियान्वित करें। भव्य भारत की संरचना करें, ताकि हम विश्व के आकर्षण का केंद्र बनें। कहा कि भारत का विकास करने का यह मतलब नहीं है कि भारत को अमेरिका बना दिया जाए। ऐसा करने से हमारा राष्ट्र विश्व के आकर्षण का केंद्र नहीं बनेगा।
एकजुटता से हारेंगी बाहरी शक्तियां
शंकराचार्य ने कहा कि जब उनसे एक धर्मगुरु ने पूछा कि पहाड़ों में अनेक धर्मों के लोग प्रवेश कर चुके हैं, ऐसे में हिन्दू क्या करें, तो इसका उत्तर है कि प्रत्येक परिवार एक घंटा स्वयं के लिए निकाले और हर कोई एक रुपया जमा करे। उसका उपयोग अपने मठ-मंदिरों को सुरक्षित करने, सुव्यवस्थित बनाने के लिए करें। इससे एकजुटता आएगी और बाहरी शक्तियां हारेंगी। अन्यथा उत्तराखंड में विभिन्न धर्म के लोग हिन्दुओं पर भारी पड़ते रहेंगे। इसके लिए सभी को एकजुट होने की जरूरत है।
पहाड़ों पर पलायन, नेता जिम्मेदार
शंकराचार्य ने जनता द्वारा पहाड़ों से पलायन और बढ़ते नशे के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि पहाड़ों से पलायन के लिए नेता जिम्मेदार हैं। कहा कि स्मार्ट सिटी, स्प्रिचुअल सिटी की बात कहकर नेता जनता को ललचा रहे हैं। लोग शहरों में पहुंच तो रहे हैं, लेकिन उन्हें यहां न तो शुद्ध मनोभाव, न शुद्ध पानी, न शुद्ध मिट्टी और न शुद्ध हवा मिल रही है। लोग सिर्फ खानपान तक ही सीमित रह गए हैं। नई पीढ़ी कहां जा रही है, इसकी चिंता करना भूल गए हैं।
