हल्द्वानी: यहां अनुबंध नहीं बढ़ा तो 150 स्वास्थ्य कर्मचारियों की रोजी पर छाएगा संकट
हल्द्वानी, अमृत विचार। बीसी जोशी कोविड केयर अस्पताल की समय सीमा खत्म होने वाली है। इससे यहां काम करने वाले 150 कर्मचारियों की रोजी पर संकट बन आया है। कर्मचारियों को भी अनुबंध बढ़ने का इंतजार है। कोविड की दूसरी लहर के दौरान डीआरडीओ ने अपने खर्चे से मेडिकल कॉलेज में 500 बेड का कोविड …
हल्द्वानी, अमृत विचार। बीसी जोशी कोविड केयर अस्पताल की समय सीमा खत्म होने वाली है। इससे यहां काम करने वाले 150 कर्मचारियों की रोजी पर संकट बन आया है। कर्मचारियों को भी अनुबंध बढ़ने का इंतजार है।
कोविड की दूसरी लहर के दौरान डीआरडीओ ने अपने खर्चे से मेडिकल कॉलेज में 500 बेड का कोविड केयर अस्पताल बनाया था। इस अस्पताल के संचालन के लिए 150 कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। यह कर्मचारी यहां पर सफाई से लेकर मरीजों की देखभाल करने का भी काम करते हैं।
इस अस्पताल का अनुबंध नौ दिसंबर को खत्म होने वाला है। अस्पताल के संचालकों का कहना है कि यदि अनुबंध आगे नहीं बढ़ा तो इस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बंद करनी पड़ेंगी। ऐसा हुआ तो इन कर्मचारियों की सेवा भी समाप्त करनी पड़ेंगी। अस्पताल के अधिकतर कर्मचारी गरीब तबके से हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों को नौकरी की काफी जरूरत है।
ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए गया ऑर्डर
हल्द्वानी। बीसी जोशी कोविड अस्पताल का अनुबंध खत्म होने वाला है। वहीं, कोविड की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए मरीजों के उपचार के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अस्पताल में मौजूद 500 बेडों में से 125 बेड ऑक्सीजन सप्लाई वाले हैं। साथ ही आपात स्थिति में सभी 500 बेडों पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की जा सकती है। सभी बेडों पर ऑक्सीजन की व्यवस्था करनी पड़ी तो तीन दिन तक ही सप्लाई की जा सकती है। इसे देखते हुए 20 ऑक्सीजन सिलेंडर और मंगाए जा रहे हैं।
150 बेडों पर है पांच लाख बच्चों का जिम्मा
जिले में 18 साल से कम आयु के बच्चों की संख्या पांच लाख रुपये है। कोविड की दूसरी लहर के दौरान यह दावा किया गया था कि अब बच्चों के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लेकिन अब जब कोविड की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है तब भी बच्चों के उपचार के मामले में स्वास्थ्य विभाग की कोई खास तैयारी देखने को नहीं मिली है। बीसी जोशी अस्पताल में जहां बच्चों के उपचार के लिए 100 बेड हैं वहीं दूसर ओर एसटीएच में 50 बेड ही हैं। नैनीताल जिला ही बल्कि यह अस्पताल कुमाऊं के प्रमुख कोविड अस्पताल हैं। ऐसे में पांच लाख बच्चों के गहन उपचार के लिए अभी 150 बेडों का ही आसरा है।
मिनी स्टेडियम में धूल फांक रहा कोविड अस्पताल
मिनी स्टेडिमय में 100 बेड का कोविड अस्पताल धूल फांक रहा है। यहां दरवाजे बंद हैं। खिड़कियों से झांकने पर पता चला कि अंदर व्यवस्था पूरी तरह से अस्त व्यस्त है। कोविड के मरीजों के उपचार के लिए अभी इस अस्पताल को फिर से तैयार करना होगा।
डीआरडीओ द्वारा बनाए गए अस्पताल का अनुबंध बढ़ाने की बात चल रही है। इसके लिए पत्राचार किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही अनुबंध बढ़ जाएगा।- डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी
