कोरोना का नया वेरिएंट ज्यादा खतरनाक, फिर भी सब बेफिक्र…
लखनऊ। न मुंह पर मास्क, न सोशल डिस्टेसिंग की फिक्र। सेनेटाइजेशन तो लोग भूल ही चुके हैं। यह आलम तब है जब कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्रॉन बेहद खतरनाक है। इस नया वेरिएंट के फैलने से रोकने के लिए शासन-प्रशासन एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। लेकिन जन सामान्य को ही इसकी फिक्र नहीं …
लखनऊ। न मुंह पर मास्क, न सोशल डिस्टेसिंग की फिक्र। सेनेटाइजेशन तो लोग भूल ही चुके हैं। यह आलम तब है जब कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्रॉन बेहद खतरनाक है। इस नया वेरिएंट के फैलने से रोकने के लिए शासन-प्रशासन एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। लेकिन जन सामान्य को ही इसकी फिक्र नहीं है। बाजारों के साथ ही सरकारी विभागों के आला अधिकारी भी इस मामले में लापरवाही बरत रहे हैं। नया वेरिएंट ओमीक्रॉन आने के बाद भी हर कदम पर कोविड-19 गाइड लाइन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
परिवहन निगम मुख्यालय- कैसरबाग के मंडलायुक्त कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर परिवहन निगम मुख्यालय मौजूद हैं। इस कार्यालय में कोरोना की रोकथाम के लिए गेट पर लगाई गई सेनेटाइजेशन मशीन गायब हो चुकी है। टम्परेचर लेने वाला सिस्टम खराब हो गया है। कमरों में बैठे अधिकारी भी बेपरवाह दिखे। प्रधान प्रबंधक आशुतोष गौड़ से जब नियमों की अनदेखी की बात की गई तो उन्होंने किसी भी तरह की जानकारी होने से इंकार कर दिया। परिवहन आयुक्त कार्यालय में भी लोग कोविड-19 लाइन की धज्जियां उड़ाते नजर आए।
बस अड्डा और बसें – राजधानी में चार बस अड्डे हैं और इनमें दाखिल होने और निकलने के कई रास्ते हैं। आलमबाग, चारबाग, कैसरबाग और अवध सभी जगहों पर यात्री बिना जांच के ही निकल रहे हैं। बस अड्डों पर यात्रियों की सुविधा के लगाई गई सेनेटाइजेशन मशीनें गायब हो चुकी हैं। रोडवेज बसों में भी यात्री ठूंस कर भरे जा रहे हैं। बिना मास्क के ही लोग यात्रा कर रहे हैं। बाहर से आने वाले यात्रियों की जांच भी नहीं हो रही है। प्रधान प्रबंधक संचालन आशुतोष गौड़ ने कहा कि मुझे नहीं पता हैं कि बस अड्डों और बसों में लापरवाही बरती जा रही है या नहीं।
चारबाग रेलवे स्टेशन और लखनऊ जंक्शन – कहीं भी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं दिखी। स्टेशनों पर जांच टीम बैठी रही और यात्री बिना जांच कराए ही बाहर निकलते रहे। चारबाग में तो बाहर निकलने के लिए तकरीबन नौ से अधिक रास्ते हैं, ऐसे में यात्री उन रास्तों से भाग निकले। लखनऊ जंक्शन पर यात्री जांच कराने में आना-कानी करते नजर आए। स्टेशनों पर टिकट के लिए लाइन लगाए लोग भी कोरोना संक्रमण को लेकर बेपरवाह दिखे।
आरटीओ और एआरटीओ ऑफिस- ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ और देवा रोड स्थित एआरटीओ ऑफिस में भी कोरोना को लेकर नियमों की अनदेखी की जा रही है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले लाइन में खड़े हैं, लेकिन कोई मास्क नहीं लगाए दिखा।
खेल विभाग- केडी सिंह बाबू स्टेडियम के पास बने खेल विभाग में भी नियमों की अनदेखी की जा रही है। यहां पर धूप सेंकतें अधिकारियों ने न तो मास्क लगा रखे थे, न ही उन्हें सोशल डिस्टेसिंग की कोई फिक्र थी। सब राम ही भरोसे दिखा।
जिलाधिकारी कार्यालय में भी नहीं हो रहा है नियमों का पालन- जिलाधिकारी कार्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, नगर निगम, मंध्याचंल विद्युत वितरण निगम कार्यालय के साथ ही अन्य सरकारी विभागों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए बने नियमों की लोग अनदेखी करते नजर आए। बैंकों का हाल भी कुछ ऐसा ही हो गया है।
बाजारों में हो रही भीड़- राजधानी के बाजारों में भी लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों ने जहां मास्क पहनना ही छोड़ दिया है वहीं ग्राहक भी सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान नहीं रख रहे हैं। गुरुवार को नजीराबाद और अमीनाबाद की बाजार में पैर रखने को जगह नहीं मिली। बिना मास्क के ही लोग खरीदारी करते नजर आए। इसके अलावा अमीनाबाद, आलमबाग, इंदिरा नगर, गोमती नगर सहित अन्य बाजारों में लोग बेपरवाह दिखाई पड़े।
बिना मास्क के ही तमंचे पर डिस्को- सहालग के चलते अधिकांश इलाकों में शादियां हो रही हैं। लेकिन इन शादी बारात के कार्यक्रम में लोग संक्रमण के खतरे की अनदेखी कर रहे हैं। बिना मास्क के ही तमंचे पर डिस्को किया जा रहा है। कहीं भी सोशल डिस्टेसिंग का पालन नहीं हो रहा है।
चिक्तिसक भी नहीं दे रहे ध्यान- खास बात यह है कि राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में चिक्तिसक भी न तो मास्क पहन रहे, न ही सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रख रहे हैं। यह आलम तब है जब सभी तरह की मरीजों का ध्यान इन चिक्तिसकों को रखना है। इनके संक्रमित होने जरूरतमंदों को उचित इलाज नहीं मिल पाएगा।
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