बरेली: दिव्यांगता से उपर उठ समाज में जगाई शिक्षा की अलख
बरेली, अमृत विचार। अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो कोई भी कठनाई आपका रास्ता नहीं रोक सकती। आपका हौसला हर कठनाई को हरा सकता है। अपने हौसले की दम पर जाट रेंजिमेंट सेंटर के लेखा जोखा कार्यालय में ऑडिटर के पद पर तैनात सैय्यद शबीह अब्बास नकवी दूसरे दिव्यांगों के लिये …
बरेली, अमृत विचार। अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो कोई भी कठनाई आपका रास्ता नहीं रोक सकती। आपका हौसला हर कठनाई को हरा सकता है। अपने हौसले की दम पर जाट रेंजिमेंट सेंटर के लेखा जोखा कार्यालय में ऑडिटर के पद पर तैनात सैय्यद शबीह अब्बास नकवी दूसरे दिव्यांगों के लिये प्रेरणा स्त्रोत बने हैं। बचपन से ही शारीरिक रूप से 80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बाद भी शबीह अब्बास नकवी ने अपनी हिम्मत और लगन के बल पर स्वयं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अब बच्चों की प्राथमिक शिक्षा के लिए निशुल्क विद्यालय खोलकर शिक्षा की अलख जगाई है।
मूल रूप से संभल जिले के सिरसी कस्बे के सादक सराय निवासी सैय्यद शबीह अब्बास नकवी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बरेली के ही इस्लामियां मांटेसरी स्कूल से की। इसके बाद वर्ष 1993 में जवाहर लाल इंटर कॉलेज सिरसी से हाई स्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।
उन्होंने बताया कि जिस विद्यालय में वह पढ़ रहे थे, उसमें इंटमीडियट में विज्ञान की कक्षाएं संचालित नहीं होती थीं। इसके चलते 10 किलोमीटर दूर हिन्द इंटर कॉलेज संभल में इंटर प्रवेश लिया। जहां पर्याप्त साधन न होने के बाद भी उन्होंने अपने आत्मविश्वास व पढ़ने की ललक के चलते इंटरमीडियट की परीक्षा भी उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा के लिए सैय्यद शबीह अब्बास नकवी ने मुरादाबाद के हिन्दू महाविद्यालय में प्रवेश लिया जहां वर्ष 1998 में स्नातक, वर्ष 2000 में अर्थशास्त्र व वर्ष 2002 में राजनीति विज्ञान से एमए किया।
विद्यार्थी जीवन से ही पल्स पोलियों अभियान में रहे सक्रिय
विद्यार्थी जीवन से ही सैय्यद शबीह अब्बास नकवी शैक्षिक, सामाजिक संगठनों में सक्रिय रहते थे। दिव्यांगता को देश से मिटाने के लिए सदैव ही शासन की ओर से चलने वाले पल्स पोलियो के अभियान में उन्होंने सदैव निशुल्क सहयोग किया। आसपास के बच्चों के लिए शिक्षा को लेकर भटकना न पड़े इसके लिए प्रांरभिक शिक्षा के लिए दो विद्यालय बनवाएं जहां आज भी बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही शिक्षाविदों व अन्य साथियों के साथ मिलकर तमाम सामाजिक कार्य भी किए। कोरोना काल के दौरान भी उन्होंने तीन दिन का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में दान किया।
राज्य स्तरीय पुरस्कार से भी हो चुके सम्मानित
सरकार की ओर से वर्ष 2008 में सैय्यद शबीह अब्बास नकवी को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा इनके द्वारा संचालित संस्था यूनिटी चिल्ड्रेन एकेडमी को राष्ट्रीय बाल भवन नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश शासन से मान्यता मिली है। जहां राष्ट्रीय बाल भवन नई दिल्ली के सहयोग से कंप्यूटर लैब भी स्थापित की गई है। साहित्यिक रुचि के चलते मानव संसाधन मंत्रालय के एनसीपीयूल द्वारा राष्ट्रीय स्तर के पांच सेमीनार भी यह आयोजित कर चुके हैं। वहीं,2010 में कर्मचारी चयन आयोग से चयनित हो कर जाट रेजीमेंट सेंटर में चयनित हुए। जिसके बाद विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण कर आडिटर के पद पर पदोन्नति प्राप्त की।
साहित्य में भी रूचि
शबीह अब्बास नकवी साहित्यिक संस्था बज्मे मीसम की मासिक नशिस्त में भी अपना कलाम पेश करते हैं। इसके साथ ही शबीह सिरसिवी के मुशायरों और टीवी के कार्यक्रमों में भी अपनी शायरी पढ़ते रहते हैं। शबीह अब्बास आज हजारों लोगो के लिए प्रेरणास्रोत है जो सिर्फ भाग्य के भरोसे रहते है उनको शबीह अब्बास नकवी को देखकर मेहनत करनी चाहिऐ । शबीह अब्बास नकवी सेना में सेवा को खुदा का तोहफा बताते है वो कहते है कि मुझे गर्व है कि जो सैनिक राष्ट्र की सेवा करता है मुझे उनकी सेवा का अवसर मिला है अपनी कामयाबी का श्रेय परिजनों के साथ अपने मित्रो को देते है जो सदैव इनको सहयोग के साथ इनके मनोबल को बढ़ाते है।
