बरेली: 75 फीसदी खातों में रकम पहुंची फिर भी पुरानी ड्रेस में आ रहे कई छात्र
बरेली, अमृत विचार। भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए इस बार सरकारी स्कूलों में ड्रेस वितरण की व्यवस्था में शासन ने बदलाव किया था। ड्रेस, स्वेटर, जूते-मोजे और बैग की खरीद के लिए अभिभावकों के खातों में सीधे 11-11 सौ रुपये भेजे गए थे। करीब 75 फीसदी अभिभावकों के खातों में धनराशि पहुंच भी गई लेकिन …
बरेली, अमृत विचार। भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए इस बार सरकारी स्कूलों में ड्रेस वितरण की व्यवस्था में शासन ने बदलाव किया था। ड्रेस, स्वेटर, जूते-मोजे और बैग की खरीद के लिए अभिभावकों के खातों में सीधे 11-11 सौ रुपये भेजे गए थे। करीब 75 फीसदी अभिभावकों के खातों में धनराशि पहुंच भी गई लेकिन अब भी स्कूलों में कई छात्र पुरानी ड्रेस या फिर रंग-बिरंगे कपड़ों में ही स्कूल पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि अभिभावकों ने बच्चों के लिए ड्रेस की खरीद ही नहीं की है। कई बच्चे तो ठंड शुरू होने के बावजूद स्वेटर तक नहीं पहनकर आ रहे हैं।
जिले में उच्च प्राथमिक, प्राथमिक, परिषदीय और कंपोजिट स्कूलों की कुल संख्या 4959 है। इन स्कूलों में कुल छात्रों की संख्या 7 लाख 10 हजार से ज्यादा है। ठंड के सीजन की शुरुआत हो चुकी है। स्कूली बच्चों को ठंड से बचाव के उद्देश्य से शासन ने डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खातों में 11-11 सौ रुपये स्थानांतरित कर दिए हैं। इस धनराशि से 6 सौ रुपये में दो जोड़ी ड्रेस, एक स्वेटर के लिए 2 सौ रुपये और शेष 3 सौ रुपये में दो जोड़ी जूते व मोजे और बैग की खरीदारी करनी है। शिक्षकों के लाख कहने के बाद भी स्कूल में बच्चे पूरी यूनिफॉर्म में नहीं आ रहे हैं। हालांकि, अभी जनपद के लगभग 25 फीसद बच्चों के खातों में आधार सीडिंग व बैंक संबंधी दिक्क्तों के कारण धनराशि नहीं पहुंची है।
इतनी धनराशि में नहीं हो सकती पूरी ड्रेस की खरीदारी
अभिभावक बोले-इतने रुपये में कैसे ड्रेस खरीदें
चनेहटा स्थित प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता रूपकिशोर का कहना है कि दो जोड़ी ड्रेस बाजार में कम से कम 5 सौ रुपये की मिल रही है। बैग की कीमत 350 से ज्यादा है। स्वेटर की कीमत भी करीब 350 रुपये है। ऐसे में इतनी धनराशि में जो खरीद सकते हैं, बच्चों के लिए खरीद रहे हैं।
अभिभावक नाजीम अंसारी का कहना है कि आजकल इतनी महंगाई के समय में इतने कम धनराशि में बच्चों के ड्रेस की खरीदारी नहीं हो सकती, बल्कि शहर की दुकानों में भी इतनी कम कीमत पर ड्रेस नहीं मिल रही है।
कुछ बच्चों के खातों में नहीं पहुंची धनराशि
स्कूल में आने वाले छात्रों व उनके अभिभावकों से रोजाना कहा जा रहा है कि वह ड्रेस व स्वेटर पहनकर आएं। फिर भी कुछ बच्चे पूरी ड्रेस में नहीं आ रहे हैं। -अमित सक्सेना, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, कांधरपुर
डीबीटी के जरिए कुछ अभिभावकों के खातों में अभी धनराशि नहीं पहुंचने की बात सामने आ रही है। इसलिए भी सभी बच्चे यूनिफार्म में नहीं आ रहे हैं। उम्मीद है कि एक हफ्ते के भीतर सभी बच्चों के खातों में धनराशि पहुंच जाएगी। -महावीर प्रसाद, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, जल्लापुर
