सीतापुर: आंगनबाड़ी केंद्र से शिक्षिकाएं नदारद, बच्ची लगाती मिली झाड़ू, जिम्मेदार बने लापरवाह
सीतापुर। तमाम दावों, वादों और प्रयासों के बाद भी सरकारी शिक्षा के सिस्टम में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। कुछ स्कूलों में कभी शिक्षक नहीं आते तो कभी शिक्षामित्र नदारद रहते हैं। कमोवेश आंगनबाड़ी केंद्रों का भी यही हाल है। सकरन इलाके के एक आंगनबाड़ी केंद्र पर देश का भविष्य कहे जाने …
सीतापुर। तमाम दावों, वादों और प्रयासों के बाद भी सरकारी शिक्षा के सिस्टम में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। कुछ स्कूलों में कभी शिक्षक नहीं आते तो कभी शिक्षामित्र नदारद रहते हैं। कमोवेश आंगनबाड़ी केंद्रों का भी यही हाल है। सकरन इलाके के एक आंगनबाड़ी केंद्र पर देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को शिक्षा देना तो दूर, उनसे झाड़ू लगवाए जाने का मामला सामने आया है।
आंगनबाड़ी केंद्र पर शिक्षा को लेकर पड़ताल की गई तो मामला बेहद चौकाने वाला निकला। इस केंद्र से शिक्षिकाएं नदारद थीं। कुछ बच्चे बैठे थे। उन्हीं में से एक बालिका आंगनबाड़ी केंद्र में झाड़ू लगा रही थी। खास बात यह कि शिक्षा विभाग के आला से अदना अधिकारी तक ऐसे मामलों को लेकर बिल्कुल संजीदा नहीं दिख रहे।
सूत्रों का दावा है कि सकरन विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय में ही आंगनवाडी केन्द्र संचालित है। इस आंगनबाड़ी केंद्र में नौनिहालों को पढ़ाने के लिये दो अध्यापिकाएं रुक्मिणी व ऊषा रानी के अलावा कलावती व मीना देवी आंगनबाड़ी कार्यकत्री भी हैं, लेकिन यहां शिक्षण कार्य पर इनकी लापरवाही की वजह से अक्सर ग्रहण लगा रहता है। इस आंगनबाड़ी केंद्र के कुछ बच्चों ने बताया कि विद्यालय में तैनात अध्यापिकायें महीने में दो-चार दिन ही स्कूल आती हैं। सोमवार को इसकी पड़ताल की गई।
पड़ताल के दौरान सुबह करीब 10 बजे विद्यालय का ताला खुला था। वहां कुछ बच्चे बोरी बिछाकर उस पर बैठे हुये थे। इसी केंद्र में पढ़ाई करने पहुंची एक बालिका शिक्षा ग्रहण करने के बजाय वहां झाड़ू थामे हुए स्कूल का कूड़ा-करकट साफ कर रही थी। बच्चे बे-यार-वो-मददगार वहां खिलड़वा कर रहे थे। सूत्रों का दावा है कि इस दौरान वहां से दोनों अध्यापिकायें और आंगनवाडी कार्यकत्री नदारद थीं। जिस शिक्षा के केंद्र में नौनिहाल कलम पकड़ कर शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं, वहां उनके हाथ में जिम्मेदारों की लापरवाही से झाड़ू पकड़ना पड़ता रहा है।
शिक्षा को लेकर जिम्मेदार भी लापरवाह?
शिक्षा विभाग के जिम्मेदार भी सरकारी शिक्षा को लेकर लापरवाह नजर आ रहे हैं। सकरन इलाके के एक आंगनबाड़ी केंद्र पर बालिका के झाड़ू लगाने को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनके फोन ही नहीं उठे। सकरन इलाके के खंड शिक्षा अधिकारी जितेंद्र बहादुर चौधरी को फोन लगाया गया तो उनका फोन ही नहीं उठा। इतना ही नहीं बीएसए अजीत कुमार का सीयूजी नंबर पर भी नहीं उठा। इस सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभागीय जिम्मेदार सरकारी शिक्षा को लेकर कितने संजीदा हैं।
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