किसकी जिम्मेदारी

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Edited By Amrit Vichar
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संसद के शीतकालीन सत्र में जो रहा है, उससे लगता है कि वह अब चर्चा व कानून बनाने से अधिक हंगामे का मंच बन गया है। राज्यसभा में 12 सांसदों का निलंबन वापस लेने का मुद्दा मंगलवार को भी छाया रहा और विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बाधित रही। जबकि सत्र शुरू …

संसद के शीतकालीन सत्र में जो रहा है, उससे लगता है कि वह अब चर्चा व कानून बनाने से अधिक हंगामे का मंच बन गया है। राज्यसभा में 12 सांसदों का निलंबन वापस लेने का मुद्दा मंगलवार को भी छाया रहा और विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बाधित रही। जबकि सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में हंगामा कम और चर्चा ज्यादा होने की उम्मीद जताई थी, जिस पर पानी फिरता नजर आ रहा है। कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के सासंद कह रहे हैं कि 12 सदस्यों का निलंबन असंवैधानिक है। विपक्ष के सदस्यों को नियम के तहत निलंबित नहीं किया गया है।

जिस घटना के लिए सदस्यों को निलंबित किया गया वह 11 अगस्त को हुई थी लेकिन सदस्यों को अगले सत्र में निलंबित किया है। पहले सत्र की गतिविधियों को लेकर सदस्यों को अगले सत्र में निलंबित नहीं किया जा सकता। सरकार सदन को नहीं चलाना चाहती है और समसामयिक मुद्दों पर बहस नहीं चाहती है, इसलिए विपक्ष के आग्रह पर सदस्यों का निलंबन रद नहीं किया जा रहा है। जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि सदन में ऐसे व्यवहार को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके लिए सजा न दी गई तो यह चलता ही रहेगा।

सजा से बचने की शर्त है माफी। निलंबित सदस्य ज्यों ही अपने व्यवहार के लिए माफी मांग लेंगे, निलंबन रद कर दिया जाएगा। मगर विपक्ष माफी मांगने को तैयार नहीं है। माफी का मामला अटका हुआ है और संसद का कीमती समय इसकी भेंट चढ़ता जा रहा है। अब जो बात दोनों पक्षों के समझने की है, वह यह कि संसदीय लोकतंत्र को सही ढंग से चलाना दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है और यह काम वे दूसरे पक्ष पर सारा दोष मढ़कर नहीं कर सकते।

संसदीय जनतंत्र में संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चले इसकी मुख्य जिम्मेदारी सत्तारूढ़ पक्ष की होती है। लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि विपक्ष की कोई जिम्मेदारी ही नहीं होती। भाजपा के साथ संसद में वही हो रहा है जो उसने विपक्ष में रहते कांग्रेस के साथ किया। दुर्भाग्य की बात है कि भाजपा और कांग्रेस की एक-दूसरे से हिसाब बराबर करने की राजनीति में क्षेत्रीय दल हमेशा इन दोनों दलों का मोहरा बनते रहे हैं।

राजनीतिक दलों ने मान लिया है कि बिना रुकावट के संसद की कार्यवाही चलना सरकार की जीत है और विपक्ष की हार। यह मानना कि संसद में सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास एक ही हथियार है संसद की कार्यवाही को ठप करना, कमजोर विपक्ष का लक्षण है।