आरक्षण सहित निषादों की अन्य समस्याओं का समाधान हमारी प्राथमिकता: अमित शाह
लखनऊ। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लखनऊ में निषाद पार्टी द्वारा आयोजित रैली में कहा कि उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण देने की मांग सहित उनकी अन्य समस्याओं का सरकार प्राथमिकता से समाधान करेगी। शाह ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी …
लखनऊ। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लखनऊ में निषाद पार्टी द्वारा आयोजित रैली में कहा कि उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण देने की मांग सहित उनकी अन्य समस्याओं का सरकार प्राथमिकता से समाधान करेगी। शाह ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और निषाद पार्टी की यहां संयुक्त रैली को संबोधित करते हुये कहा कि निषाद समुदाय की लंबित मांगों पर सरकार प्राथमिकता से ध्यान दे रही है।
इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पिछली सरकार में निषाद समुदाय का आरक्षण अवरुद्ध करने की समस्या के निपटारे का भरोसा दिया। रैली को संबोधित करते हुये शाह ने विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस पर दलित, पिछड़े और अन्य समुदायों के बीच जाति के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगाते हुये कहा कि इन दलों ने समाज में वैमनुष्यता पैदा कर अपने पारिवारिक हितों की पूर्ति की।
उन्होंने कहा, “इससे पहले प्रदेश में जो भी सरकारें रही, सपा या बसपा, उन्होंने सिर्फ अपने काम किये। कभी निषाद समाज का काम नहीं किया, गरीबों का कोई काम नहीं किया। यहां स्थित रमाबाई अंबेडकर मैदान में आयोजित ‘सरकार बनाओ अधिकार पाओ’ रैली में शाह और योगी के अलावा उत्तर प्रदेश में चुनाव के लिये भाजपा के प्रभारी और केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं दिनेश शर्मा ने भी शिरकत की।
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शाह ने भारत की सामाजिक समरसता में निषाद समाज के पौराणिक महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरित मानस में भगवान तुलसीदास जी ने कहा था कि जब प्रभु श्रीराम और माता सीता को भूमि पर सोते देखा तो निषाद राज जी की आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी थी। उन्होंने कहा कि सपा बसपा और कांग्रेस जैसे दलों ने निषादों के सम्मान को कोई महत्व ही नहीं दिया।
