उत्तराखंड में होगी बंदरों व लंगूरों की गणना, 18 से 20 दिसंबर तक की जाएगी रेकी, फिर होगी गिनती
अंकुर शर्मा, अमृत विचार, हल्द्वानी। वन विभाग उत्तराखंड में बंदरों व लंगूरों की गणना करने जा रहा है। इनकी गणना 21 दिसंबर को होगी। यह गणना पूरे छह साल बाद होगी। इससे पूर्व वर्ष 2015 में इनकी गणना हुई थी। प्रदेश के पर्वतीय व मैदानी जनपदों में बंदरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। …
अंकुर शर्मा, अमृत विचार, हल्द्वानी। वन विभाग उत्तराखंड में बंदरों व लंगूरों की गणना करने जा रहा है। इनकी गणना 21 दिसंबर को होगी। यह गणना पूरे छह साल बाद होगी। इससे पूर्व वर्ष 2015 में इनकी गणना हुई थी।
प्रदेश के पर्वतीय व मैदानी जनपदों में बंदरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। बंदर, जंगलों से निकलकर गली-मोहल्ले तक पहुंच गए हैं। मानव वन्यजीव प्रबंधन के मकसद से वन विभाग ने बंदरों व लंगूरों की गणना करने का फैसला किया है। इसमें जंगलों से लेकर गली-मोहल्लों तक बंदरो की गिनती की जाएगी। यह गणना 21 दिसंबर को होगी। इनकी साइटिंग मैथड से गणना की जाएगी। बंदरों व लंगूरों की गणना के लिए फॉरेस्ट गार्ड से रेंजर्स को प्रशिक्षण दिया गया है।
मानव बस्तियों के पास रहते हैं बंदर व लंगूर
वन अधिकारियों के अनुसार, बंदर व लंगूर अमूमन ह्यूमन फ्रेंडली होते हैं। ये आमतौर पर मानव बस्तियों, कूड़ाघरों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों व हाईवे पर बहुतायत में पाये जाते हैं। जहां इन्हें आसानी से भोजन उपलब्ध हो जाता है। फलदार वृक्षों वाले जंगलों में भी बंदर पाये जाते हैं।
गणना से पहले होगी रेकी
वन अधिकारियों के मुताबिक बंदरों की गणना से पूर्व बंदरों व लंगूरों की रेकी की जाएगी। बंदरों की जीवनशैली में होता है कि वे शाम को समूह में इकट्ठा होते हैं और सुबह अलग हो जाते हैं। इसलिए यदि इनकी रेकी कर ली जाए तो गिनती करने में परेशानी नहीं होगी।
2015 में मिले थे 1.54 लाख बंदर व 54,800 लंगूर
वन विभाग ने वर्ष 2015 में बंदरों और लंगूरों की गणना की थी तब राज्य में 1.54 लाख बंदर और 54,800 लंगूर पाए गए थे। अब इस गणना के बाद बंदरों व लंगूरों की संख्या में वृद्धि या घटोत्तरी का पता चल सकेगा।
गौलापार में प्रस्तावित है प्रदेश का सबसे बड़ा बंदरबाड़ा
वन विभाग की तराई पूर्वी वन डिवीजन के अंतर्गत गौलापार के दानीबंगर में 100 हेक्टेयर वन भूमि में प्रदेश का सबसे बड़ा बंदरबाड़ा बनाने की योजना है। इसमें बंदरों को प्राकृतिक वासस्थल में ही बाड़े में रखा जाएगा। इस योजना का शिलान्यास हो गया है लेकिन अभी तक फाइल कागजों में ही धूल फांक रही है।
प्रदेश में छह साल बाद बंदरों व लंगूरों की गणना की जा रही है। इससे पूर्व, छह साल पहले वर्ष 2015 में इनकी गिनती हुई थी। 18-20 दिसंबर तक बंदरों, लंगूरों की रेकी व 21 दिसंबर को गणना होगी। इस बाबत वन स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।- दीप चंद्र आर्य, वन संरक्षक, पश्चिमी वन वृत्त, हल्द्वानी
