तार्किक सुझाव
देश के 17 से अधिक राज्यों में जब कोरोना का नया स्वरूप 350 से अधिक का आंकड़ा पार कर गया है, इलाहाबाद उच्च न्यायालय का चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को टालने का सुझाव तार्किक नजर आता है। देश में अभी तक ऑमिक्रॉन के …
देश के 17 से अधिक राज्यों में जब कोरोना का नया स्वरूप 350 से अधिक का आंकड़ा पार कर गया है, इलाहाबाद उच्च न्यायालय का चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को टालने का सुझाव तार्किक नजर आता है। देश में अभी तक ऑमिक्रॉन के 358 मामले सामने आ चुके हैं। महाराष्ट्र में ऑमिक्रॉन के सर्वाधिक 88 मामले सामने आए हैं। दिल्ली में 67 और तेलंगाना में 38 व्यक्ति ऑमिक्रॉन से संक्रमित मिले हैं। साथ ही तीसरी लहर आने की संभावना है।
ऑमिक्रॉन की तीव्र संक्रमण गति को देखते हुए केंद्र सरकार ने गुरुवार को इस चुनौती से मुकाबले के लिए राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को नए दिशा-निर्देश दिए, जिसमें भीड़-भाड़ वाले आयोजनों पर रोक लगाने और स्थानीय स्तर पर रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाने की सलाह दी गई। केंद्र महसूस कर रहा है कि संपूर्ण लॉकडाउन अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है। कुछ राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर टीकाकरण तेजी से पूरा करने को कहा गया है। विडंबना है कि यह जानते हुए भी कि कोविड-19 का वायरस नित नए रूप में सामने आ रहा है और लोग टीका लगवाने से परहेज कर रहे हैं।
हालांकि राज्यों ने केंद्र के निर्देशों पर अमल करते हुए सख्ती बरतनी शुरू कर दी है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में रात्रि कालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। हरियाणा में नव वर्ष से बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट, होटलों, रेस्टोरेंट्स, शापिंग मॉल्स एवं बैंक में बिना कोरोना टीका लगाए लोगों को प्रवेश न करने देने की बात कही गई है। पंजाब सरकार ने बिना टीकाकरण प्रमाण-पत्र के सरकारी कर्मियों को वेतन देने से इनकार किया है।
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दिल्ली में क्रिसमस और नववर्ष पर भीड़ न जुटने देने का निर्देश दिया है। निस्संदेह, हमें पहली-दूसरी लहर की त्रासदी से सबक लेकर तैयारी करनी चाहिए। ध्यान रहे दूसरी लहर के दौरान प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ने काफी लोगों को संक्रमित किया। सैकड़ों लोगों की मौत हो गई। अब फिर से पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव निकट हैं। इसके लिए राजनीतिक दल रैली, सभाएं करके लाखों की भीड़ जुटा रहे हैं।
रैलियों में कोरोना प्रोटोकाल का पालन संभव ही नहीं है। इसलिए तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर लोगों को अपने लिए सावधानी बरतनी होगी और राजनीतिक दल व सरकार केवल चिंता जताने से आगे आकर सजग व जिम्मेदार व्यवहार करें वरना स्थिति दूसरी लहर से ज्यादा भयावह होगी।
