मुरादाबाद : लाखों रुपये खर्च के बाद भी जगमग नहीं हो सकीं महानगर की सड़कें
मुरादाबाद, अमृत विचार। वर्ष 2021 भी समाप्ति की ओर है, इस वर्ष भी शुरुआत में बंधने वाली विकास की उम्मीदें वक्त के साथ धुंधली हो गई। तमाम दावों और उम्मीद के बीच लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी महानगर की सड़कें जगमग नहीं हो सकी है। शाम होते ही महानगर की तमाम गलियों में …
मुरादाबाद, अमृत विचार। वर्ष 2021 भी समाप्ति की ओर है, इस वर्ष भी शुरुआत में बंधने वाली विकास की उम्मीदें वक्त के साथ धुंधली हो गई। तमाम दावों और उम्मीद के बीच लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी महानगर की सड़कें जगमग नहीं हो सकी है। शाम होते ही महानगर की तमाम गलियों में अंधेरा पसर जाता है।
बजट मंजूर होने के बाद कहीं पर लाइटें खराब हैं तो कहीं पर अभी तक खंभे भी नहीं लग सके हैं। यही वजह है कि सिविल लाइंस से दयानंद डिग्री कालेज की ओर जाने वाली पाश सड़क पर विक्टोरिया लाइट लगना तो दूर, खंभे भी नहीं लग सके हैं। इसके अलावा लाइनपार में मोक्षधाम के अलावा कई अन्य सड़कें भी शाम होते ही अंधेरे में तब्दील हो जाती हैं। जिस कारण हादसों के साथ ही आपराधिक घटनाओं का खतरा बना रहता है।
लाइटें तो दूर, इस साल खंभे तक नहीं लग पाए: कोरोना काल के कारण काफी समय तक नगर निगम बोर्ड की बैठक नहीं हुई। जुलाई में जब बैठक हुई तो पार्षदों ने पथ-प्रकाश व्यवस्था का मुद्दा उठाया। कई हादसों के साथ ही अपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए मरम्मत कराने के साथ ही नई लाइटें लगवाने की मांग की गई। जिस पर 1.50 करोड़ रुपये लाइटों-खंभे और 50 लाख रुपये बिजली के उपकरण खरीदने के लिए मंजूर हुए थे।
बजट मंजूर होने के बाद सिविल लाइंस कोतवाली से दयानंद डिग्री कालेज तक करीब 40 खंभों पर विक्टोरिया लाइट लगवाने का प्रस्ताव तैयार हो गया था। इसके अलावा लाइनपार मोक्षधाम के पास 10 व आसपास के क्षेत्र में खंभे लगवाने की तैयारी कर ली गई थी। आनन-फानन में टेंडर भी कर दिए गए। लेकिन बाद में यह दोनों प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में चले गए। यही वजह है कि लाइटें तो दूर अभी तक खंभे भी नहीं लग सके हैं।
अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने कहा कि खराब लाइटों की शिकायत मिलने पर उनको सही करा दिया जाता है। दोनों प्रोजेक्ट के टेंडर निकाल दिए गए हैं। उम्मीद है कि जनवरी में काम भी शुरू कर दिया जाएगा।
