यूपी का खराब प्रदर्शन
नीति आयोग द्वारा जारी किए गए चौथे स्वास्थ्य सूचकांक के अनुसार समग्र स्वास्थ्य प्रदर्शन के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे खराब स्थिति में है, जबकि केरल फिर से शीर्ष रैंकिंग वाले राज्य के रूप में उभरा है। तमिलनाडु और तेलंगाना दूसरे और तीसरे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों के रूप में उभरे हैं। नीति आयोग की …
नीति आयोग द्वारा जारी किए गए चौथे स्वास्थ्य सूचकांक के अनुसार समग्र स्वास्थ्य प्रदर्शन के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे खराब स्थिति में है, जबकि केरल फिर से शीर्ष रैंकिंग वाले राज्य के रूप में उभरा है। तमिलनाडु और तेलंगाना दूसरे और तीसरे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों के रूप में उभरे हैं। नीति आयोग की ओर से यह सूचकांक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ परामर्श तथा विश्व बैंक के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत दिए जाने वाले प्रोत्साहन से इस सूचकांक को जोड़ा जाना इसके महत्व को रेखांकित करता है। स्वास्थ्य लक्ष्यों की प्राप्ति में गति लाने के लिये सहकारिता और प्रतियोगी संघवाद का लाभ उठाने हेतु इस स्वास्थ्य सूचकांक को एक उपकरण के रूप में विकसित किया गया है। रिपोर्ट से विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति तथा प्रगति का आकलन करने में सहायता मिलेगी।
नीति आयोग ने देश की पहली व्यापक स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट 2018 में जारी की थी। स्वास्थ्य चूंकि राज्यों का विषय है, इसलिए नीति आयोग ने राज्यों के बीच स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, ज़िम्मेदारी और परस्पर प्रतियोगिता को बढ़ावा देने के लिए काम किया और उनके लिए रैंकिंग जारी की।
सूचकांक जिन प्रमुख स्वास्थ्य मानकों और अन्य स्वास्थ्य व्यवस्था व सेवाओं की डिलीवरी के सूचकों के आधार पर तैयार किया गया है, इसमें नवजात मृत्यु दर 5 साल तक की उम्र में मृत्यु दर, कुल जन्म दर, जन्म के समय लिंगानुपात, क्षय रोग के मामलों की कुल दर व संस्थागत डिलीवरी की हिस्सेदारी आदि प्रमुख हैं।
गौरतलब है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता या पहुंच का बुनियादी ढांचा बिखरे स्वरूप में नज़र आता रहा है। केंद्र सरकार राज्यों के सहयोग से इस असंतुलन को दूर करने के प्रयासों के तहत कई कदम उठा रही है। जनस्वास्थ्य राज्य का विषय होने के कारण इसके कार्यान्वयन की प्राथमिक ज़िम्मेदारी राज्यों की है। इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को उनकी स्वास्थ्य परिचर्या प्रणाली के सुदृढ़ीकरण हेतु आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
कहा जा सकता है कि रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत को उजागर किया है। विरोधी दल कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले आई नीति आयोग की यह रिपोर्ट राज्य में चुनावी अभियान का मुद्दा बन सकती है। वहीं सरकारी थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि टॉप पर आए राज्यों में भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार की जरूरत है।
