नए हथियार

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Edited By Amrit Vichar
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देश में कोरोना के नए रूप ओमीक्रान के मामले तमाम सावधानी के बावजूद बढ़ रहे हैं। ओमीक्रान के अब तक 653 मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज किए गए। जबकि सोमवार को कोरोना के 6358 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 293 मरीजों की मौत …

देश में कोरोना के नए रूप ओमीक्रान के मामले तमाम सावधानी के बावजूद बढ़ रहे हैं। ओमीक्रान के अब तक 653 मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज किए गए। जबकि सोमवार को कोरोना के 6358 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 293 मरीजों की मौत हुई है। कोरोना टीकाकरण मुहिम को एक साल पूरा हो रहा है। इस अवधि में देश की 61 फीसदी वयस्क आबादी को टीके की दोनों खुराक लगाई जा चुकी हैंं और 90 फीसदी वयस्क आबादी एक खुराक ले चुकी है। जबकि वैश्विक स्तर पर टीके लगाने वालों की संख्या केवल 48 प्रतिशत है।

अब कोरोना वायरस के बेहद संक्रामक स्वरूप ओमीक्रान के आने से सरकार अब बुजुर्गों, स्वास्थ्य सेवा और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को तीसरी खुराक देने के लिए टीकाकरण की शुरुआत कर रही है। चुनाव आयोग ने पांच चुनावी राज्यों में बची हुई योग्य आबादी के वैक्सीनेशन की रफ्तार और तेज करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि कोरोना के विरुद्ध देश में भी सभी मोर्चों पर लड़ाई लड़ी जा रही है। कोविड-19 को हराने के लिए चल रही इस लड़ाई के बीच एक अच्छी खबर मंगलवार को आई है। कोरोना की दो नई वैक्सीनों-कोवोवैक्स और कोर्बीवैक्स को इस्तेमाल की इजाजत मिल गई है। इन्हें इस्तेमाल करने संबंधी एक सिफारिश ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया को भेज दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने जानकारी दी कि इन दो टीकों के साथ ही कोविड की दवा मोलनुपीराविर की गोली को भी मंजूरी दी गई है।

इसका इस्तेमाल आपात स्थिति में ही करने की इजाजत होगी। अभी तक देश में कोरोना की दो वैक्सीन- कोविशील्ड और कोवैक्सिन दी जा रही हैं। कहा जा सकता है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भारत को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। माना जा सकता है कि नई वैक्सीन आने के साथ ही आने वाले समय में वैक्सीनेशन की रफ्तार और भी तेज हो जाएगी। नए टीके कोवोवैक्स को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बनाया है। कोविशील्ड को भी सीरम ही बना रहा है।

2021 का साल वैश्विक और देश के टीका उद्योग के लिए अहम रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोनावायरस महामारी के भविष्य की लहरों के लिए तैयारी शुरू करने की जरूरत है। समझा जा सकता है कि हमारा दवा उद्योग पूरी दुनिया के लिए एक बहुमूल्य संपदा है। तीनों दवाओं को मिली मंजूरी से कोरोना के खिलाफ वैश्विक संघर्ष को मजबूती मिलेगी।