मुरादाबाद : नए साल में चाइल्ड लाइन को मिल सकता है भवन
मुरादाबाद,अमृत विचार। विभिन्न मुकदमों में बरामद होने वालीं बालिकाओं ने चाइल्ड लाइन के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 24 घंटे के आदेश के बाद भी बरामद होने वालीं तमाम बच्चियों से पांच से 10 दिन तक चाइल्ड लाइन में रखा जा रहा है। लिहाजा उनके साथ महिला आरक्षी भी हर वक्त चाइल्ड लाइन …
मुरादाबाद,अमृत विचार। विभिन्न मुकदमों में बरामद होने वालीं बालिकाओं ने चाइल्ड लाइन के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 24 घंटे के आदेश के बाद भी बरामद होने वालीं तमाम बच्चियों से पांच से 10 दिन तक चाइल्ड लाइन में रखा जा रहा है। लिहाजा उनके साथ महिला आरक्षी भी हर वक्त चाइल्ड लाइन में ड्यूटी देने को मजबूर हैं।
लिहाजा चाइल्ड लाइन के पदाधिकारियों ने इस समस्या का समाधान करने के लिए डीएम को कई बार पत्र भेजा। देर से ही सही, लेकिन आगामी वर्ष में गांगन में बन रही इमारत में भवन मिलने की उम्मीद जगी है। अमूमन जिन नाबालिग बच्चियों का अपहरण या फिर बहलाकर भगा ले जाने की रिपोर्ट होती है, पुलिस उनको बरामद करने के बाद पहले चाइल्ड लाइन लाती है।
बेसहारा घूमने वाले बच्चों को भी चाइल्ड लाइन लाया जाता है। इसके बाद सभी को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाता है, जो बच्चियां मुकदमे से संबंधित होती हैं, उनका मेडिकल व बयान दर्ज कराने के बाद कोर्ट के आदेश पर शेल्टर होम भेजा जाता है या फिर उनके परिवार वालों को सुपुर्द किया जाता है। जबकि लावारिस मिले बच्चों को उम्र के हिसाब से अलग-अलग शेल्टर होम भेजा जाता है। मुरादाबाद में जिगर कॉलोनी में चाइल्ड लाइन का कार्यालय है।
भवन तंग और हंगामों के कारण उठी थी मांग
चाइल्ड लाइन के पदाधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में भवन तंग हो गया है। वहीं, मुकदमों से संबंधित मामलों में बरामद नाबालिग के मेडिकल, बयान और उनकी सुपुर्दगी के संबंध में निर्णय नहीं हो पाता है तो बच्चियों को चार-पांच दिन दिन तक चाइल्ड लाइन के भवन में रखना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार बच्चियों के साथ उनकी सुरक्षा में लगी महिला आरक्षी भी चाइल्ड लाइन के भवन में ठहरती हैं। जबकि नियमानुसार 24 घंटे तक ही बच्चियों को चाइल्ड लाइन में रख सकते हैं। कई बार बरामद किशोरियों ने चाइल्ड लाइन के कार्यालय पर हंगामा कर दिया था। एक माह पहले रेलवे स्टेशन से बरामद बच्चियों ने कार्यालय में तोड़फोड़ की थी। इससे पहले भी कई बार हंगामे हो चुके हैं।
आशा ज्योति केंद्र के लिए कई बार पत्राचार किया गया। अब डीएम कार्यालय से आश्वासन मिला है कि बरामद बच्चियों की सुपुर्दगी में देरी होती है तो उनको गांगन में बन रही इमारत में रखने के लिए एक भवन उपलब्ध कराया जाएगा। -श्रद्धा शर्मा, समन्वयक, चाइल्ड लाइन
